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देहदान कर हमें लोक कल्याण के लिए तन मन धन समर्पित करने की प्रेरणा दी |
प्रतिमा परांजपे का निधन, परिजनों ने किया देहदान
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। प्रतिमा परांजपे (ताईजी) ने 88 वर्ष की आयु पूर्ण करके आज 31 मार्च को प्रातः काल अंतिम श्वास ली। उनके निधन से समाज, राष्ट्र सेविका समिति और संघ कार्यों में एक अपूरणीय क्षति हुई है।
आदरणीय प्रतीमा परांजपे का जन्म 19 जून 1938 को हुआ। 28 जून 1958 को पुरुषोत्तम परांजपे का शुभ विवाह उज्जैन निवासिनी प्रतिमा परांजपे जी के साथ संपन्न हुआ। यह केवल एक पारंपरिक परिणय नहीं था, बल्कि दो आत्माओं का गहन आध्यात्मिक मिलन था। ताईजी समिति की सेविकाओं एवं संघ के स्वयंसेवकों को मातृवत् स्नेह और सेवा से संचित करती थीं। उनका यह स्नेह इतना गहरा था कि कई स्वयंसेवक और सेविकाएँ, उनकी इस मातृवत् पहचान और स्नेह के कारण, संघ और समिति के व्रत को अंगीकार करने लगे। बहुतों ने स्वयंसेवक बनकर, तो कई सेविकाएँ समिति की सदस्य बनकर, उनके दिखाए मार्ग पर चल पड़ीं।
राष्ट्र सेविका समिति चितौड़ प्रांत की वरिष्ठतम सेविकाओं में से थी। ताईजी ने अपने अथक प्रयासों से अजमेर में सेविका समिति का कार्य आगे बढ़ाया। उनकी दिशा-निर्देशन में सैकड़ों सेविकाएँ तैयार हुईं, जिन्होंने समाज में बदलाव लाने का अद्वितीय कार्य किया। ताई जी सेविकाओं की प्रेरणा पुंज थी । ताई जी की इच्छा शक्ति बहुत प्रबल थी और इसी आंतरिक शक्ति के कारण बड़े से बड़े शारिरिक कष्टों के बावजूद उनके मुख मण्डल पर एक स्निग्ध मुस्कान रहती थी । चिकित्सालय में भी वो सेविकाओं को गीत और भजन याद करवाती थी। आपने अंतिम पड़ाव को भी प्रतिमा ताईजी ने प्रेरणास्पद बनाते हुए मानव कल्याण के लिए देहदान कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर हमें लोक कल्याण के लिए तन मन धन समर्पित करने की प्रेरणा दी है।

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