प्रवेश नीति में नवाचार: अधिकतम छात्र प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय का व्यापक अभियान
सोशल मीडिया, व्यक्तिगत संपर्क और संस्थागत संसाधनों के प्रभावी प्रक्षेपण एवं प्रचार पर कुलगुरु का जोर
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने आगामी सत्र के लिए प्रगतिशील एवं परिणामोन्मुख प्रवेश नीति को विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी विभागों एवं संकाय सदस्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान किए।
कुलगुरु ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक परिदृश्य में केवल पारंपरिक माध्यमों से प्रवेश बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्यक्तिगत संवाद और संस्थागत प्रचार के समन्वित प्रयासों के माध्यम से ही विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों की प्रथम पसंद बनाया जा सकता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय की सभी उपलब्धियों, सुविधाओं, पाठ्यक्रमों एवं अधोसंरचना का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक सटीक जानकारी पहुंच सके।
कुलगुरु ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि संकाय सदस्य स्वयं विभिन्न महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करें तथा उन्हें विश्वविद्यालय में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, शोध अवसरों एवं आधुनिक सुविधाओं के बारे में अवगत कराएं। उन्होंने इसे एक मिशन मोड अभियान के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रत्येक विभाग अपने-अपने पाठ्यक्रमों में निर्धारित सीटों को पूर्ण भरने के लिए व्यक्तिगत संपर्क, नेटवर्किंग एवं संवाद का अधिकतम उपयोग करे। कुलगुरु ने कहा कि जो पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और समाज दोनों के हित में हैं, उनमें प्रवेश सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल एवं अन्य सुविधाओं का अधिकतम प्रक्षेपण (Maximum Projection) किया जाए, ताकि विद्यार्थियों में विश्वास एवं आकर्षण उत्पन्न हो सके।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने सभी संकाय सदस्यों एवं अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस प्रवेश अभियान को कुलाधिपति एवं राज्यपाल महोदय के मार्गदर्शन के अनुरूप संचालित करें तथा उनके निर्देशों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि “यदि हम समन्वित और प्रतिबद्ध प्रयास करें, तो विश्वविद्यालय न केवल अपनी सभी सीटों को भर सकता है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से समाज में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।” कुलगुरु ने सभी से आह्वान किया कि वे इस प्रवेश अभियान को एक साझा दायित्व के रूप में स्वीकार करते हुए सक्रिय सहभागिता निभाएं और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना योगदान दें।

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