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एमडीएस विश्वविद्यालय में विभिन्न रोजगारोन्मुखी एवं नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रारम्भ

एमडीएस विश्वविद्यालय में विभिन्न रोजगारोन्मुखी एवं नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रारम्भ

एमडीएस विश्वविद्यालय में विभिन्न रोजगारोन्मुखी एवं नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रारम्भ

विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की दिशा में बड़ा कदम : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

योग, फार्मेसी, पर्यावरण, प्रबंधन, आईटी एवं पोषण विज्ञान जैसे क्षेत्रों में खुलेंगे नए अवसर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल, शोध एवं रोजगार आधारित शिक्षा पर विश्वविद्यालय का विशेष फोकस


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर  द्वारा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी एवं समकालीन शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है। छात्र विश्वविद्यालय की वैबसाइट पर https://mdsuajmer.ac.in/admission/  पर क्लिक करके एड्मिशन फॉर्म ऑनलाइन भर सकते हैं| कुलगुरु प्रो॰ सुरेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रारम्भ किए गए ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान, कौशल विकास, शोध एवं रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार वर्तमान समय की वैश्विक आवश्यकताओं, उद्योगों की मांग एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इन पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता एवं रोजगारपरक कौशल भी अर्जित कर सकें। विश्वविद्यालय में जिन पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रारम्भ किए गए हैं उनमें एम ए संस्कृत, एम ए अँग्रेजी, बी.एससी. फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन – 20 सीटें, बी.एससी. (नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस) – 20 सीटें, योगा इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स – 20 सीटें, बी.फार्मा – 60 सीटें, डी.फार्मा – 60 सीटें, बी.एससी. (ऑनर्स) एनवायरनमेंटल साइंस – 20 सीटें, सर्टिफिकेट कोर्स इन बर्डिंग (CCB) – 20 सीटें, एमबीए – 60 सीटें, एमबीए (डेटा साइंस) – 60 सीटें, बीसीए – 20 सीटें प्रमुख रूप से शामिल हैं।


कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी एवं तकनीकी युग में विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि कौशल आधारित एवं बहुआयामी शिक्षा की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय इसी सोच के साथ ऐसे पाठ्यक्रम प्रारम्भ कर रहा है जो विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करें। उन्होंने कहा कि फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन, फार्मेसी एवं नेचुरोपैथी जैसे पाठ्यक्रम स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेक्टर में बढ़ती संभावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, जबकि एनवायरनमेंटल साइंस एवं बर्डिंग जैसे पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करेंगे। इसी प्रकार एमबीए एवं एमबीए (डेटा साइंस) जैसे पाठ्यक्रम आधुनिक प्रबंधन, डिजिटल तकनीक एवं डेटा आधारित निर्णय क्षमता विकसित करने में सहायक होंगे। वहीं बीसीए पाठ्यक्रम सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं नवाचार के नए द्वार खोलेगा। कुलगुरु ने बताया कि योगा इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स एवं बी.एससी. (नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस) के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं समग्र स्वास्थ्य विज्ञान का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिसकी वर्तमान समय में राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अत्यधिक मांग है। विश्वविद्यालय ने इच्छुक विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे समय रहते प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करें तथा विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट एवं संबंधित विभागों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। उन्होने कहा कि  ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, शोध क्षमता, उद्यमिता एवं रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा एमडीएस विश्वविद्यालय को नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान प्रदान करेंगे।

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