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बारिश में ना रहे कोई भी स्कूल जर्जर, सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प

बारिश में ना रहे कोई भी स्कूल जर्जर, सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प

बारिश में ना रहे कोई भी स्कूल जर्जर, सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प

विधानसभा अध्यक्ष ने किया एक करोड़ लागत से रामनगर व बोराज स्कूलों में शिलान्यास

बनेंगे नए कक्षा-कक्ष, विद्यार्थियों को मिलेगी सहूलियत

विद्यार्थी को संस्कारवान बनाएं शिक्षक, सशक्त हो राष्ट्रबोध


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि बारिश का समय नजदीक है। शहर के किसी भी स्कूल में कोई भवन या कक्ष जर्जर ना रहे। बच्चों को हर तरह के खतरे से दूर रखा जाएग। शिक्षक विद्यार्थियों में राष्ट्रबोध जागृत करें। उन्हें संस्कारवान एवं सुयोग्य नागरिक बनाएं।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गुरुवार को क्षेत्र के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नवीन कक्षा-कक्षों के निर्माण कार्यों का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक दायित्वबोध का निर्माण भी शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय रामनगर में 44.82 लाख रुपये की लागत से बनने वाले तीन नवीन कक्षा-कक्षों के निर्माण कार्य का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों के बैठने की पर्याप्त और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित होना अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं तथा क्षेत्र के लगभग 11 विद्यालयों में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से कक्षा-कक्ष निर्माण काय होंगे।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों का शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम ही उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। इसके साथ विद्यालय में शत प्रतिशत विद्यार्थियों के 60 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना आवश्यक है। शिक्षक विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय देकर उन्हें बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करें तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी रोटेशन के आधार पर शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ देश, समाज और संस्कृति के प्रति कर्तव्यबोध का भी ज्ञान दिया जाना चाहिए।

देवनानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विश्व को ज्ञान और विज्ञान का मार्ग दिखाने वाली सभ्यता रहा है। शून्य की खोज से लेकर प्राचीन वैज्ञानिक अवधारणाओं तक भारत की महान परंपरा विद्यार्थियों को बताई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के विकसित एवं संस्कारित राजस्थान के विजन को साकार करने में शिक्षकों और अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने विद्यालयों में भाईचारे एवं संस्कारयुक्त वातावरण निर्माण की आवश्यकता बताते हुए कहा कि विद्यार्थी आपस में भाई-बहन कहकर संबोधित करें। इससे सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों का विकास हो सकेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से समय पर विद्यालय आने, अनुशासन में रहने तथा शिक्षकों की आज्ञा का पालन करने का आह्वान किया। वहीं अभिभावकों से बच्चों के गृहकार्य और अध्ययन की नियमित समीक्षा करने को कहा।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विद्यालय में पुस्तकालय निर्माण के प्रयास हो एवं विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाएगी । उन्होंने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अतिरिक्त महापुरुषों की जीवनी, विज्ञान एवं अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी वर्ष में कम से कम एक अतिरिक्त पुस्तक अवश्य पढ़े।

उन्होंने विद्यालय स्टाफ द्वारा जनसहभागिता से लगभग दो लाख रुपये व्यय कर विकास कार्य करवाने की सराहना की तथा एसडीएमसी सदस्यों, स्थानीय संस्थाओं, बैंक एवं भामाशाहों से भी विद्यालय विकास में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जन्मदिवस एवं अन्य यादगार अवसरों पर विद्यालयों को उपयोगी सामग्री भेंट करने की परंपरा विकसित की जानी चाहिए तथा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की सहायता के लिए समाज आगे आए। इस दौरान महिला शौचालय निर्माण में सहयोग देने पर श्रीमती वंदना का अभिनंदन भी किया गया। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों की मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। शिक्षा से कोई भी बच्चा वंचित नहीं रहे । इसके लिए प्रतिबद्धता से संसाधन विकास एवं विकास कार्य किया जा रहे है। 

इसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय बोराज में भी 44.82 लाख रुपये की लागत से बनने वाले तीन कक्षा-कक्षों के निर्माण कार्य का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय क्षेत्र की पुरानी शैक्षणिक संस्थाओं में से एक है। जहां से अनेक पीढ़ियां शिक्षित होकर आगे बढ़ी हैं। उन्होंने विद्यालय के परीक्षा परिणामों में सुधार की आवश्यकता बताते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों के लिए उच्च लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं में अधिक से अधिक विद्यार्थियों के 60 प्रतिशत से ऊपर अंक लाने का लक्ष्य तय किया जाना चाहिए तथा छात्राओं को गार्गी पुरस्कार प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाए। छात्राएं शिक्षा के साथ खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में भी भाग लें जिससे उनका समग्र विकास हो सके।

देवनानी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। ऎसा नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो आगे चलकर रोजगार देने वाला बने तथा समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे। उन्होंने विद्यार्थियों से ग्रीष्मकालीन अवकाश में कम से कम एक महापुरुष की जीवनी पढ़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने शिक्षकों से जिला मुख्यालय पर पदस्थापन का लाभ उठाकर विद्यार्थियों को प्रातः एवं सायंकाल अतिरिक्त समय देने तथा आवश्यकतानुसार उनके घर जाकर अभिभावकों से समन्वय स्थापित करने को कहा । साथ ही विद्यालयों में नामांकन वृद्धि एवं नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए ।

इस अवसर पर शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक दिनेश ओझा, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर एवं राजश्री, दीपक शर्मा, शेखर उबाना, अंकुर मित्तल, एसडीएमसी सदस्य मानसिंह, महेंद्र, रूपसिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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