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कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने चाणक्य भवन का किया औचक निरीक्षण

कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने चाणक्य भवन का किया औचक निरीक्षण

कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने चाणक्य भवन का किया औचक निरीक्षण

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल ने आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित चाणक्य भवन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थापन, वित्त एवं लेखा तथा सामान्य प्रशासन अनुभागों का गहन अवलोकन करते हुए व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। निरीक्षण के दौरान कुलगुरु ने विशेष रूप से साफ-सफाई और कार्यस्थल की सुव्यवस्था पर बल देते हुए कहा कि प्रशासनिक भवनों की स्वच्छता न केवल कार्यक्षमता को बढ़ाती है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति और अनुशासन को भी दर्शाती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी अनुभागों में नियमित रूप से साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए तथा अभिलेखों और फाइलों का सुव्यवस्थित संधारण किया जाए। वित्त एवं लेखा अनुभाग के निरीक्षण के समय कुलगुरु ने भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय से संबंधित सभी प्रकार के भुगतान समयबद्ध तरीके से किए जाएं, जिससे कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं एवं अन्य हितधारकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों की प्रगति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।


निरीक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के अभियंता प्रदीप प्रजापति, संस्थापन अनुभाग की कल्पना सोनी, सामान्य प्रशासन के मंगतू राम शर्मा तथा वित्त एवं लेखा अनुभाग के अशोक लखोटिया उपस्थित थे | कुलगुरु ने उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता, दक्षता और समयबद्धता के साथ करने के निर्देश प्रदान किये | कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय की समग्र प्रगति के लिए प्रशासनिक दक्षता, समय पर कार्य निष्पादन और सकारात्मक कार्यसंस्कृति अत्यंत आवश्यक है, और सभी अधिकारी एवं कर्मचारी इस दिशा में मिलकर कार्य करें ताकि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और सुदृढ़ हो सके।

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