सिन्धी भाषा केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापना के लिये कार्यशाला उपयोगी - तीर्थाणी
सिंधी शिक्षा मित्रों का साक्षात्कार व परिचर्चा कार्यक्रम सम्पन्न
अजमेर (अजमेर मुस्कान) सिन्धी भाषा की केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये यह शिक्षक कार्यशाला व सिन्धी बाल संस्कार शिविर ही अधिक उपयोगी है इससे विद्यार्थियों को मातृभाषा से जोडने का सुअवसर मिला है ऐसे विचार राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद की ओर से सिंधी सर्टिफिकेट कोर्स (ग्रीष्मकालीन) की कक्षाओं के संचालन हेतु भारतीय सिंधु सभा राजस्थान न्यास द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार तीर्थाणी ने माँ अम्बी देवी चावला सिंधु भवन में मुख्य वक्ता के रूप में कहे। तीर्थाणी ने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षण मातृभाषा में कराने की पालना में ऐसे शिविर आवष्यक है। सभा की ओर से 2018 में आयोजित सिन्धू महाकुम्भ में संविधान की आठवीं अनुसूचि में मान्यता प्राप्त सिन्धी भाषा केन्द्रीय विश्वविद्यालय का प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से मांग करते हुये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैै।
न्यास के अध्यक्ष मोहनलाल वाधवाणी ने कहा कि पिछले पांच वषों से राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद द्वारा सर्टीफिकेट कोर्स, डिप्लोमा व एडवांस डिप्लोमा की कक्षायें से सभी को जोडने का सेवा कार्य किया जा रहा है और संगठन के आग्रह पर इस वर्ष सिंधी सर्टिफिकेट कोर्स को संचालित करने की अनुमति प्राप्त हुई है जिसके लिये भारत सरकार का आभार प्रकट करते हैं।
सभा के प्रदेशाध्यक्ष ईश्वरलाल मोरवाणी ने बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में सिन्धी बाल सस्कार शिविरों का आयोजन आगामी 15 मई से 15 जून तक आयोजित किये जायेगें। शिविरों में 5 से 15 वर्ष की बच्चे भाग लेतें है। सिन्धी भाषा के अलावा गीत, संगीत, योग, प्रार्थना, महापुरूषों का जीवन परिचय पर चर्चा की जाती है। प्रदेश की ओर ज्ञानवर्धक पुस्तक, पंजीयन फार्म, प्रशस्ति पत्र, बैनर छपवाकर उपलब्ध करवाये जाते हैं। नित्य समापन पर सिन्धी व्यजनों का अल्पहार वितरण होता है। धार्मिक केन्द्रों पर अधिक आयोजन से सनातन संस्कार से जुडाव होता है। स्थानीय पंचायत, सामाजिक, धार्मिक व शैक्षणिक संगठनों का सहयोग लिया जाता है।
प्रदेशाध्यक्ष मातृशक्ति शोभा बसंताणी ने कहा कि शिविरों का आयोजन मातृशक्ति के सहयोग से किया जाता है जिसमें भाषा ज्ञान के साथ सिन्धी व्यंजन व स्वरोजगार के अवसर का भी ज्ञान कराया जाता है।शिविर समापन पर मंचीय कार्यक्रम में बच्चों द्वारा गीत संगीत की प्रस्तुतियां दी जाती है जिससे अभिभावक भी सम्मिलित होते हैं। शिवरो का समापन 16 जून को सिंधुपति महाराजा दाहरसेन का बलिदान दिवस होने के कारण इस दिन या पूर्व संध्या पर देशभक्ति आधारित कार्यक्रम भी आयोजित कर सम्मानित किए जाते हैं।
प्रदेश महामंत्री गिरधारी ज्ञानाणी, प्रदेश भाषा व साहित्य मंत्री डॉ. प्रदीप गेहाणी, नवलकिशोर गुरनाणी, रमेश केवलाणी, सहित प्रदेश, संभाग व जिला स्तर के पदाधिकारी सहयोग करते हैं। प्रदेश पदाधिकारियों की ओर से प्रवास कर तैयारियां पूर्ण की जाती हैं।
संयोजक मंडल के नवल किशोर गुरनाणी ने कहा कि दो दिवसीय साक्षात्कार कार्यक्रम व कार्यशाला 25 और 26 अप्रैल को निर्धारित योग्यताधारी 145 सिंधी शिक्षकों का साक्षात्कार हुआ।
संयोजक मंडल के डॉ. प्रदीप गेहाणी, गिरधारीलाल ज्ञानाणी, जय कुमार चंचलाणी, रमेश केवलाणी, हिना सामनाणी, सावित्री जेसवाणी ने साक्षात्कार कार्यक्रम में सिंधी लैंग्वेज लर्निंग कोर्स व भारत सरकार की अलग अलग योजना की विस्तृत जानकारी देते हुये परिचर्चा और अनुभव कथन भी कराया।
आयोजन में हीरालाल तोलाणी, मूलचन्द बसतांणी, नारायण परनाणी, किशनचन्द भागवाणी, सिन्धी सेन्ट्रीय पंचायत महामंत्री धर्मदास मोटवाणी, लक्ष्मीचन्द लालवाणी, देवानंद कोरजाणी, सावित्री दीदी सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे। जयपुर सहित अजमेर, अलवर, बीकानेर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, किशनगढ़, किशनगढ़ बास, गुलाबपुरा, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, खैरथल, निवाई, सवाईमाधोपुर, कोटा, पाली उदयपुर शहरों से सिन्धी शिक्षामित्र व शिक्षाविद् सम्मिलित हुए ।

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