क्या कर रहे हैं हम, क्या ऐसा होता है लॉकडाउन ?शाहपुरा (मूलचन्द पेसवानी)। शाहपुरा की जनता बहुत समझदार है फिर भी यहां कोरोना वायरस सक्रमण से निबटने के लिए राष्ट्रव्यापी लोक डाउन को शत प्रतिशत सफल नहीं किया जा पा रहा है। शाहपुरा का अपना लंबा इतिहास रहा है। 14 अगस्त 1947 को ही आजादी का तिरंगा फहराने वाले शाहपुरा ने जिसने देश को दिशा दी, जिसने देश को बताया कि आजादी क्या होती है। क्रांतिकारी बारहठ परिवार ने अपने परिवार का ही बलिदान दे दिया। यहां काॅलेज बनाने के लिए राजपरिवार ने झोली फैला दी, सेटेलाइट चिकित्सालय बनाने के लिए भूमि दान कर दी वहीं सेटेलाइट चिकित्सालय के लिए जनप्रतिनिधि भूख हड़ताल पर क्या बैठे अपना मुख्यमंत्री होने पर भी सबकुछ हाथ में लेकर आंदोलन समाप्त किया। यहां की बालाजी की छतरी पर का. जगदीश टेलर सहित अन्य की अगुवाई में शहर हित में हुए आंदोलन जिसमें एक आवाज पर सबकुछ रूक जाता था। आज उस शाहपुरा में इतना सबकुछ कहने के बाद भी लोक डाउन नहीं हो पा रहा है।
कहावत है कि देश काल और परिस्थिति के हिसाब से स्वयं को फैसला करना चाहिए। वर्तमान समय में कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में क्या करना है इसका फैसला कोई कर ही नहीं पा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जिला कलेक्टर राजेन्द्र भट्ट, शाहपुरा एसडीएम श्वेता चोहान हाथ जोड़कर जनता से अपील कर चुके है कि लोक डाउन में सभी अपने घरों में रहे पर शाहपुरा के कुछ महिला पुरूष है कि घरों में रहने के बजाय तफरी करने में मस्त है। या तो उनको कोरोना संक्रमण का डर नहीं है या वो कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
ऐसे में सवाल यहां उठता है कि शाहपुरा को किसी भी समस्या को लेकर जाम करने की धमकी देने व ऐसा कार्य करने वाले संगठन व कार्यकर्ता जनता को लोक डाउन में क्यों नहीं जाम करते। ये जन प्रतिनिधि या कार्यकर्ता अपने अपने मोहल्ले की जिम्मेदारी लेकर उनको घरों में ठहरने यानि लोक डाउन को सफल बनाने में सहयोग क्यों नहीं कर रहे है। क्या इसके लिए कोई राजनीतिक संदेश या लाभ की आवश्यकता है। क्या जनप्रतिनिधि या कार्यकर्ताओं का फर्ज नहीं है कि अपने मतदाताओं को कोरोना संक्रमण से बचाये, अगर वो समझाईश करेगें तो ज्यादा प्रभाव होगा। पुलिस व प्रशासन के लिए यह काम बड़ा नहीं है। पुलिस अपनी पर अभी उतरी नहीं है, प्रशासन ने चाबूक चलाया नहीं है। अगर पुलिस व प्रशासन ने गठबंधन कर अपनी दिखा दी तो एक भी व्यक्ति नहीं दिखेगा पर हमें यह भी सोचना होगा कि ऐसा मौका ही उनको क्यों दिया जाए।
हमें धेर्य व संयम से काम लेकर प्रशासन व पुलिस के कहे अनुसार लोक डाउन को सफल बनाना ही होगा। यह मान लो कि अनिवार्यत ऐसा करना ही होगा कोई विकल्प किसी के पास नहीं बचा है, अगर विकल्प बचा होता तो सरकार उस पर ही काम करती।
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