Ticker

6/recent/ticker-posts

युवा कलाकारों ने कला अंकुर के स्थापना दिवस को बनाया यादगार

युवा कलाकारों ने कला अंकुर के स्थापना दिवस को बनाया यादगार

युवा कलाकारों ने कला अंकुर के स्थापना दिवस को बनाया यादगार 


सूचना केंद्र सभागार में संगीत की विधाओं ने छुआ आसमान 

कलाऔर संगीत बनाते है तनाव मुक्त वातावरण : जैन

अजमेर (अजमेर मुस्कान) । कला एवं संगीत को समर्पित शहर की अग्रणी  संस्था कला अंकुर के 30 वें  स्थापना दिवस के अवसर पर सूचना केंद्र सभागार में  मंगलवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या ''उपलब्धि''में नन्हे मुन्ने एवं  नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का जमकर  प्रदर्शन करते हुए वहां उपस्थित अपार जन समूह एवं संगीत प्रेमियों को मंत्र मुक्त कर दिया।

मां सरस्वती वंदना के साथ प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में गीत, संगीत, नृत्य, नाटक एवं वाद्य यंत्र की प्रस्तुतियों ने दर्शकों की तालियां बटोरी । उभरते कलाकार यशस्वी व रूत्वी ने नृत्य प्रस्तुत किया। सोनू माथुर, काव्या,ललित मिश्रा, शिवांगी, मदुरा प्रासू,बालमुकुंद, मीना शर्मा, नीता थावानी,संभावी, गौरंगी,लारण्या बनी ने कला अंकुर गीत कला अंकुरे त्व स्वागतम प्रस्तुत किया। श्रीमती सोनू माथुर ने काव्य व विद्यार्थी ललित मिश्रा डॉक्टर शांतनु शिवांगी मधुर प्रसू बालमुकुंद मीना शर्मा सहित अन्य कलाकारों ने आपकी नजरों में, मधुर राजन ने सायो नारा, ललित मिश्रा ने देखा एक ख्वाब विवेक मोती में काव्या ने और सजना बरखा बहार शिवांगी ने चंदन सा बदन गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अकादमी के सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों तथा कला अंकुर सदस्यों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों से सजी गीतमाला थी। 

व्यक्तियों की विद्यार्थियों कनिका हर उत्सव यशस्वी वह रुत्वी ने कथक नृत्य गीत मैंने पायल है पर वैदेही निवेद वान्या तृषा पूजिता व प्राची ने गीत पिया तोसे नैना पर कृषक नृत्य रोशनी तृप्ति व संजू लता ने गीत मंगल पर ध्रुव निवि प्रियांशी वानी ने प्रस्तुत किये।

इस अवसर पर एक हास्य व्यंग्य नाटक उज्जवल भविष्य का मंचन किया गया इसमें समाज के लिए एक संदेश दिया गया है कि पारंपरिक शिक्षा में दक्षता के अलावा संगीत नाटक नृत्य जैसी कलाओं में अर्जित कर  आजीविका का माध्यम बनाया जा सकता है। इसमें निर्देशन उज्जवल मित्र एवं चाय निर्देशन संदीप का रहा नाटक में डोली लवलीन राहुल प्रिंस पिंटू मनीष सौरभ एवं हर्षल ने मुख्य भूमिका निभाई।

संस्था के संरक्षक अनिल जैन ने उपस्थित जनसमूह एवं युवा कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इंटरनेट के इस युग में गीत संगीत एवं नृत्य कला के साथ-साथ अभिनय जीवन में अपना अलग स्थान रखते हैं। इससे जहां व्यक्तित्व का विकास होता है वही आपसी सद्भावना एवं तनाव मुक्त वातावरण बनता है। 

अकादमी प्राचार्य अंजना बोगावत ने इस आल्सो पर अकादमी की स्थापना व उसकी उद्देश्य के बारे में बताया महासचिव रेनू शर्मा ने सभी विशिष्ट अतिथियों  प्रायोजकों ,अकादमी शिक्षकों एवं अतिथियों को कला अंकुर स्मृति चिन्ह भेंट किए।

मंच संचालन में प्रमुख भूमिका डॉक्टर शांतनु तेला, रवि शर्मा,  काव्या,श्वेता जैन एवं काव्यांश ने निभाई। समारोह के अंत में महासचिव राजीव शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ