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स्पाइन सर्जरी से डरें नहीं, दर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक : डॉ. ए.आर. गौरी

स्पाइन सर्जरी से डरें नहीं, दर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक : डॉ. ए.आर. गौरी

स्पाइन सर्जरी से डरें नहीं, दर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक : डॉ. ए.आर. गौरी

मित्तल हॉस्पिटल में स्पाइन सर्जरी के बाद 35 वर्षीय महिला को मिली राहत, साइटिका से थी पीड़ित

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। अजमेर जिले के नसीराबाद उपखण्ड की 35 वर्षीय महिला को लम्बे समय से चले आ रहे साइटिका के दर्द से स्पाइन सर्जरी के बाद निजात मिल गई। सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ ए आर गौरी ने महिला के रीढ़ की हड्डी की मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर,अजमेर में सफल सर्जरी की। महिला शारीरिक कमजोरी, दाएं पैर में लचक, चलने, उठने, बैठने से परेशान, असहनीय दर्द की पीड़ा लेकर परामर्श के लिए पहुंची थी। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया। उसके चेहरे पर खुशी और राहत झलकने लगी। अब वह सामान्य रूप से चल-फिर पा रही है।

डॉ. गौरी ने बताया कि लोगों में स्पाइन सर्जरी को लेकर अनावश्यक डर बना हुआ है, जबकि हकीकत यह है कि समय पर उपचार नहीं लेना ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा “दर्द को नजरअंदाज करना बड़ी भूल है, इससे समस्या गंभीर रूप ले सकती है,”।

उन्होंने बताया कि आजकल बदलती जीवनशैली के कारण रीढ़ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करना, व्यायाम की कमी और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा वर्ग में भी तेजी से बढ़ रही है।

डॉ. गौरी ने यह भी स्पष्ट किया कि खेतों या मजदूरी जैसे कार्य करने वाले लोगों में भी लगातार एक ही प्रकार की शारीरिक गतिविधि के कारण रीढ़ पर दबाव पड़ता है, जिससे नस दबने की समस्या उत्पन्न होती है। इससे कूल्हे से लेकर पैरों तक दर्द और झनझनाहट होने लगती है।

नवाब गांव की 35 वर्षीय महिला पीड़िता के मामले में जांच के दौरान पाया गया कि मरीज की रीढ़ की हड्डी में असामान्य स्थिति थी, जो सामान्य एक्स-रे में स्पष्ट नहीं हो रही थी। चिकित्सकीय भाषा में मरीज को लिस्थेसियासिस

की समस्या थी जिसे सामान्य बोलचाल में रीढ़ की हड्डी का "खिसकना" या "फिसलना" कहा जाता हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें रीढ़ की एक कशेरुका (हड्डी) अपनी सामान्य स्थिति से हटकर नीचे वाली कशेरुका के ऊपर आगे (या कभी-कभी पीछे) खिसक जाती है, जिससे कमर दर्द और नसों पर दबाव जैसी समस्या हो जाती है। महिला के सर्जरी के जरिए हड्डी की स्थिति सुधारकर और दबावग्रस्त हड्डी को वापिस से सही पोजीशन में सेट किया गया, जिससे मरीज को तुरंत राहत मिली।

मरीज के परिजन ने अस्पताल की सेवाओं की सराहना करते हुए बताया कि पूरा उपचार ईएसआईसी योजना के तहत हुआ, जिससे उन्हें कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं उठाना पड़ा।

गौरतलब है कि मित्तल हॉस्पिटल में एक ही छत के नीचे विभिन्न सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को समग्र चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

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