पूज्य दाजी शुक्रवार एवं शनिवार को अजमेर में कराएंगे ध्यान
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। हार्टफुलनेस संस्थान के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य दाजी मेडिकल कॉलेेज के सभागार मेें शुक्रवार 27 मार्च तथा शनिवार 28 मार्च को हृदय आधारित ध्यान योग का अनुभव कराएंगे।
हार्टफुलनैस के कार्यक्रम समन्वयक सेवानिवृत्त आईएएस एवं विशेषाधिकारी के. के. शर्मा ने जानकारी दी कि पद्मभूषण से सम्मानित कमलेश डी. पटेल (दाजी) का अजमेर प्रवास शुक्रवार 27 तथा शनिवार 28 मार्च को निश्चित हुआ है। इन्हें राज्य सरकार के द्वारा राजकीय अतिथि घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि पूज्य दाजी के सानिन्ध्य में सामूहिक ध्यान सत्र जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉ. भीमराव अम्बेडकर सभागार में शुक्रवार को सायं 5.30 बजे एवं शनिवार को प्रातः 7 बजे आयोजित किया जाएगा। हार्टफुलनैस संस्थान के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य दाजी का प्रथम बार अजमेर आगमन हो रहा है। जिला समन्व्यक श्री गिरीश गुप्ता ने बताया कि इस कार्यक्रम में जयपुर, भीलवाडा, पुष्कर, ब्यावर, किशनगढ़ सहित अजमेर संभाग के अतिथि गण आयेगें। इसमें आमजन भी उपस्थित होकर ध्यान का अनुभव कर सकते हैं।
हार्टफुलनैस एक आध्यात्मिक आन्दोलन
हार्टफुलनैस ध्यान पद्धति हृदय पर ध्यान करने का एक सरल व सहज ढंग है। जो आन्तरिक शान्ति, प्रेम तथा दिव्यता का अनुभव कराती है। हार्टफुलनैस ध्यान पद्धति का विकास श्री रामचन्द्र मिशन के द्वारा किया गया। यह एक वैश्विक तथा गैर लाभकारी संस्था है जो 1944 से भारत में कार्यरत्त है।
इस संस्था का मुख्य उद्देश्य हृदय आधारित ध्यान, योग एवं विश्राम की विभिन्न तकनीकों द्वारा मानसिक व आध्यात्मिक उन्नति हेतु कार्य करना है। हार्टफुलनैस ध्यान के माध्यम से तनाव प्रबन्धन का उपयोग करते हुए विश्व के लाखों लोगों का जीवन परिवर्तित हुआ है। पूरे संसार में लगभग 170 देशों में इसके केन्द्र है तथा 20 हजार से अधिक प्रशिक्षक अपनी सेवायें देने को तत्पर रहते है।
21 दिसम्बर, 2025 को हार्टफुलनैस संस्था द्वारा विश्व ध्यान दिवस पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थापित किया गया। यू ट्यूब पर लाइव जुडते हुए पूरे संसार से 3,57,635 लोगों ने एक साथ ध्यान किया। यह रिकॉर्ड शीत संक्रान्ति के अवसर पर बनाया गया। विश्व ध्यान दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा की गई थी।
हार्टफुलनैस संस्था ध्यान के अतिरिक्त पर्यावरण के क्षैत्र में भी काफी सक्रिय भागीदारी निभाती है। फॉरेस्ट बाय हार्टफुलनैस प्रकल्प के द्वारा तीन करोड वृक्ष लगाने का कार्य 2030 तक पूरा करने का महान लक्ष्य रखा गया है। पर्यावरण के क्षैत्र में इण्डियन ग्रीन बिल्डिंग काउन्सिल का प्रतिष्ठित प्लेटिनम अवार्ड 2019 से सम्मानित किया गया।
शिक्षा के क्षैत्र में हार्टफुलनैस अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा प्रत्येक वर्ष मानवीय मूल्यों के विकास हेतु अखिल भारतीय निबन्ध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों विद्यार्थी भाग लेते है। यह प्रतियोगिता हार्टफुलनैस तथा यूनेस्को के युवा प्रकल्प के संयुक्त तत्वावधान में पिछले 30 वर्षों से आयोजित की जा रही है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य व कृषि से सम्बन्धित प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
कान्हा शान्ति वनम्
हार्टफुलनैस संस्थान का वैश्विक मुख्यालय कान्हा शान्ति वनम् हैदराबाद में स्थित है। यह एक अनोखा स्थान है जहां 1400 एकड की बंजर भूमि को हरियाली में परिवर्तित कर दिया गया। यह स्थान पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वृक्ष संवर्धन का उत्कृष्ट मॉडल है। यहां बीज बैंक और नर्सरी विकसित की गई है। साथ ही विलुप्त होते जा रहे वृक्षों को जैवकीय प्रयोगशाला में विकसित किया जाता है, जो इस क्षैत्र में उनकी प्रतिबद्वता दर्शाता है।
तेलगांना सरकार द्वारा कान्हा शान्ति वन को हरिता मित्र पुरष्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान सरकार द्वारा चलाये जा रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रदान किया गया है। यहां पर हरि (हार्टफुलनैस एकेडमी ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन) की स्थापना की गई। यहां कृषि तकनीक पर आधारित शिक्षा प्रदान की जाती है।
दाजी के विषय में
कमलेश डी. पटेल व्यापक रूप से दाजी के नाम से जाने जाते है। यह हार्टफुलनैस संस्थान के चौथे मार्गदर्शक हैं जो आध्यात्मिकता के अतिरिक्त योग, पर्यावरण, चिकित्सा, शिक्षा, खेल आदि के क्षैत्रों में दशकों से अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहे है। दाजी अनेक पुस्तकों के लेखक के रूप में भी समाज को दिशा देते हैं।
उनकी पुस्तकों में से कुछ के नाम डिजाइनिंग डेस्टिनी, द हार्टफुलनैस वे, द विजडम ब्रिज, हॉली तीर्थंकर और द हार्ट ऑफ लॉर्ड राम है। इनका हिन्दी सहित भारत की अनेक भाषाओं में अनुवाद उपलब्ध है। दाजी के कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें आध्यात्मिकता के क्षैत्र में 2023 में पद्मभूषण की उपाधि से सम्मानित किया गया।
हार्टफुलनैस के वैश्विक केन्द्र कान्हा शान्तिवनम् की परिकल्पना, योजना तथा कार्यान्वयन दाजी के मार्गदर्शन में किया गया और हैदराबाद के निकट विश्व के सबसे बडे मेडिटेशन हॉल में से एक कान्हा शान्ति वनम् का मूर्त रूप हमारे सामने आया। जो कभी बंजर पडी जमीन थी वह आज उत्कृश्ट पर्यावरण और सुन्दर हरियाली का जीता जागता उदाहरण बन गया। यह समस्त रूपान्तरण दाजी के प्रत्यक्ष देख रेख में ही हुआ।

0 टिप्पणियाँ