सिंधी भाषियों के लिए गर्व का क्षण, अब सिंधी भाषा में संविधान
उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया संविधान की सिंधी भाषा में लिखित पुस्तक का विमोचन
राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विश्वास जताया कि एक न एक दिन सिन्ध पाकिस्तान से अलग होकर भारत का अभिन्न हिस्सा बन सकता है
अजमेर (अजमेर मुस्कान) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार ने देश के एक करोड़ से ज्यादा सिंधी भाषियों को तोहफा दिया है। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित उप राष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने संविधान की सिंधी भाषा देवनागरी लिपि एवं फारसी लिपि में लिखित पुस्तक का विमोचन किया। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी एवं केन्द्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कार्यक्रम में कहा कि एक न एक दिन सिन्ध पाकिस्तान से अलग होकर भारत का अभिन्न हिस्सा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सिन्धी समुदाय ने अपने आपको कभी शरणार्थी नहीं वरन् सदैव पुरुषार्थी माना है और भारत और सनातन धर्म के प्रति अपनी निष्ठा को भी कभी नहीं छोड़ा है।
समारोह में केन्द्रीय विधि और न्याय राज्य (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मन्त्री श्री अर्जुनराम मेघवाल और इन्दौर से लोकसभा के सांसद शंकर लाल नंदवानी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए सिन्धी समाज के लोग उपस्थित थे। समारोह का आयोजन विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग, राजभाषा खण्ड, प्रादेशिक इकाई द्वारा किया गया।
समारोह में विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि हालांकि सिन्ध वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन आजादी से पहले यह भारत का अभिन्न हिस्सा था और आजादी के बाद 14 अगस्त 1947 को विभाजन का दंश झेलने के बाद भी सनातन धर्म के खातिर सिंधी समुदाय के लाखों लोग अपने घर बार और करोड़ों की सम्पत्ति छोड़ पाकिस्तान से विस्थापित हुए थे लेकिन उन्होंने आजादी के 79 वर्षों के बाद भी अपने देश भारत के प्रति अपनी आस्था को नहीं छोड़ा है। उन्होंने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान से अलग होकर सिन्ध फिर से भारत का अभिन्न अंग बन सकता है।
देवनानी ने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता सबसे पुरानी संस्कृति है और भारत की आत्मा से जुड़ी हुई है। विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए सिन्धी समुदाय के लोग भारत के हर कौने में छा गए और सभी लोगों के साथ दूध में शक्कर की तरह घुल मिल भी गए है। भारत में लगभग एक करोड़ सिन्धी समाज के लोग है लेकिन उन्होंने विभाजन के बाद और आज तक कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएँ है। आज भारत सहित विश्व के 150 से अधिक देशों में फैले सिन्धी समुदाय के लोग अपनी कर्मठता, पुरुषार्थ, उद्यमशीलता, व्यापार और जीवटता की अमिट छाप छोड़ रहे है। उन्होंने भारत की इकोनॉमी को बढ़ाने में बेजोड़ योगदान दिया है तथा एक प्रतिशत की आबादी वाला यह समाज देश के कुल इनकम टैक्स देने वाले लोगों में 24 प्रतिशत भागीदारी निभा रहा है। श्री देवनानी ने प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के /2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में भी सिन्धी समाज की बहुत बड़ी भागीदारी रहने की उम्मीद है।
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि वर्ष 1967 में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद आज भारतीय संविधान का सिन्धी देवनागरी और फारसी में अनुवाद होने से हम सभी का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है। इसके लिए हम प्रधानमन्त्री मोदी और केन्द्रीय कानून मन्त्री राजस्थान के ही मेघवाल के प्रति बहुत आभारी है। आज का दिन निश्चित रूप से एक गौरवशाली और ऎतिहासिक है। उन्होंने बताया कि सिंधी भाषा बहुत समृद्ध है और इसकी वर्णमाला में हिन्दी एवं अंग्रेजी से भी अधिक कुल 52 अक्षर हैं। हमारे राष्ट्रगान में भी सिन्ध को शामिल किया जाना सिन्ध के गौरवशाली इतिहास और महत्व को दर्शाता है।
देवनानी ने भारतीय संविधान के सिंधी देवनागरी में पहली बार और फारसी दूसरी बार प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार ज्ञापित किया। साथ ही कहा कि आज का दिन भारत के लगभग एक करोड़ सिंधी समुदाय के लोगों के लिए गौरवान्वित होने और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अभिनन्दन एवं आभार प्रकट करने का शुभ अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 14 अगस्त के दिन को विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करने को भी विभाजन का दर्द झेलनें वाले लोगों विशेष कर सिन्धी समाज की अस्मिता,गौरव और स्वाभिमान को बढ़ाने वाला बताया।
समारोह में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित विभिन्न प्रदेशों से दौ सौ से अधिक प्रतिनिधिगण उपस्थित थे जिनमें राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस मूलचन्दानी, एनसीपीएसएल के पूर्व निदेशक प्रताप तिजानी,राजस्थान सिन्धी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी, झूलेलाल सिन्धी सेंट्रल पंचायत समिति के मनीष ग्वालानी, रिटायर्ड व्याख्याता कमला गोकलानी, सिंधु साहित्य कल्चर सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष आर डी थारवानी, अजमेर शाखा के अध्यक्ष सुंदर मटाई, पूज्य लाल साहिब मंदिर के ट्रस्टी प्रभु लोंगानी,अमरापुरा आश्रम जयपुर के सेवाधारी गौरधन आसनानी आदि भी उपस्थित थे।

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