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हायर एजुकेशन एंड सोसाइटी विषय पर आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम संपन्न

हायर एजुकेशन एंड सोसाइटी विषय पर आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम संपन्न

हायर एजुकेशन एंड सोसाइटी विषय पर आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम संपन्न

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि किसी भी शैक्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम की वास्तविक सार्थकता उसके ‘टेकअवे’ में निहित होती है। यदि प्रतिभागी केवल सहभागिता तक सीमित रहें और सीखी गई बातों को कक्षा में लागू न करें, तो ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि शिक्षक अपने “माइंड, मेथड और मटेरियल” अर्थात् शिक्षक शिक्षार्थी संबंध, पाठ्य-सामग्री के विकास तथा प्रभावी शिक्षण-पद्धति — पर गंभीरता से पुनर्विचार करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) तक सीमित कर देना उचित नहीं है। यह नीति उच्च शिक्षा संस्थानों में क्रेडिट सिस्टम, पाठ्यक्रम संरचना, बहुविषयक दृष्टिकोण तथा समग्र परिवर्तन की अपेक्षा करती है। शिक्षकों को इन सभी पहलुओं से परिचित होकर उन्हें ईमानदारी से लागू करना चाहिए।

वे यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय द्वारा सेंट स्टीफन कॉलेज के सहयोग से आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे |

उन्होने अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने 1995-96 के एक प्रसंग का उल्लेख किया, जब एक व्याख्यान में उदाहरणों के चयन को लेकर उन्होंने यह महसूस किया कि शिक्षक को अपने उदाहरणों और शिक्षण-पद्धति के प्रति अत्यंत सजग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण ऐसा हो जो प्रकृति, पर्यावरण और व्यापक विश्व-दृष्टि के प्रति संवेदनशील हो। उन्होंने सभी संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों को विद्यार्थियों को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्य अतिथि आयुर्वेद विश्वविध्यालय के कुलगुरु प्रो. जी.एस. शुक्ला ने शिक्षा को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बताते हुए शिक्षकों से नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

इससे पूर्व एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. शिव प्रसाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति उच्च शिक्षा को अधिक लचीला, बहुविषयक, शोधोन्मुख और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होने बताया कि “हायर एजुकेशन एंड सोसाइटी” विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम में देशभर से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

समापन सत्र में कोर्स समन्वयक मोनिका शर्मा ने आठ दिनों की शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्राचार्यों और शिक्षाविदों ने नीति के विविध आयामों पर सारगर्भित व्याख्यान दिए। सेंट स्टीफन कॉलेज की प्राचार्या डॉ. कालिंदी लालचांदनी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति देने वाले सभी प्रबुद्ध रिसोर्स पर्सन का आभार व्यक्त किया कार्यक्रम के सफल संचालन में व्याख्याता रेणुपारीक, गजेन्द्र सिंह शेखावत, सरला चारण का विशेष योगदान रहा, जबकि तकनीकी सहयोग रवि मेघवाल व उनकी टीम द्वारा प्रदान किया गया।

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