विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने पुष्कर में ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ आश्रम के रजत जयंती समारोह में की सहभागिता
वेद संस्कार और राष्ट्र चेतना के संवाहक : देवनानी
संस्कार और संस्कृति से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण : भागीरथ चौधरी
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने रविवार को पवित्र तीर्थराज पुष्कर में परम् विभूषित राष्ट्र संत गोविंद देव गिरी महाराज का पावन आशीर्वाद प्राप्त कर श्री ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ आश्रम के रजत जयंती समारोह-2026 में सहभागिता की।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि आश्रम द्वारा विगत 25 वर्षों में वेदाध्ययन, संस्कार आधारित शिक्षा, राष्ट्र चेतना के जागरण और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए जो कार्य किया गया है वह समाज के लिए अनुकरणीय है। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत भी है। वेद केवल ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की शाश्वत पद्धति हैं। वे संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना से जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिकता के बढ़ते प्रभाव से मूल्यबोध कमजोर हो रहे हैं। ऎसे समय में गुरुकुल परंपरा, संस्कृत शिक्षा, योग प्रशिक्षण और नैतिक मूल्यों पर आधारित पाठ्यक्रम समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
देवनानी ने पूज्य संतों के सानिध्य में वेदपाठी विद्यार्थियों एवं आचार्यों का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वैदिक शिक्षा ही वह आधार है, जो व्यक्ति को चरित्रवान, राष्ट्रनिष्ठ और मानवतावादी बनाती है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ आश्रम जैसे संस्थान भारत की आत्मा को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं।जहां वेद, संस्कार और सेवा के माध्यम से ऎसी पीढ़ी तैयार की जा रही है जो न केवल अपनी संस्कृति से जुड़ी है बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि कृषि, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में भी वैदिक मूल्यों की प्रासंगिकता आज पहले से कहीं अधिक है और संतों के मार्गदर्शन में चल रहे ऎसे प्रयास देश को आत्मनिर्भर और नैतिक रूप से सशक्त बनाने में सहायक हैं।
निंबार्क पीठ के जगद्गुरु श्याम शरण देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि वेद और सनातन परंपरा अतीत की धरोहर नहीं हैं बल्कि वर्तमान और भविष्य का पथप्रदर्शन करने वाली दिव्य चेतना हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज अपने आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ा रहता है तभी उसमें सद्भाव, करुणा और राष्ट्रप्रेम का भाव विकसित होता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय संत गोविंद देव गिरी जी महाराज ने वैदिक परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में संस्कार, आध्यात्मिकता और राष्ट्रभक्ति का समावेश नहीं होगा, तब तक समग्र विकास अधूरा रहेगा।
समारोह में देशभर से पधारे संत-महात्माओं, वेदाचार्यों, शिक्षाविदों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य स्वरूप प्रदान किया। जहां वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा की दिव्यता का अनुपम दर्शन हुआ।

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