होली पर करें गौकाष्ठ का उपयोग
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। पर्यावरण संरक्षण एवं गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए होली के अवसर पर होलिका दहन में गौकाष्ठ के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि गौशालाओं को आत्म निर्भर बनाने, पर्यावरण संरक्षण, वातावरण शुद्धि एवं प्रकृति की सुरक्षा की कड़ी में गौशालाओं में आवासित गोवंश से प्राप्त गौउत्पाद पर्यावरण संरक्षण एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी वरदान है। इसको बढ़ावा देने के लिए निदेशालय गौपालन विभाग में होली पर्व इस बार गोबर से बनाई जाने वाली गौकाष्ठ (गोबर की लकड़ी) को अधिक से अधिक उपयोग में लेने की अपील की है। इससे पर्व का आध्यात्मिक महत्व बढ़ेगा। साथ ही पेड़ों की कटाई को भी रोका जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि अजमेर जिले में गौपालन विभाग द्वारा दो गौशालाओं का चयन गौकाष्ठ के लिए किया गया है। मदनेश गौशाला किशनगढ़ एवं तिजारती गौशाला ब्यावर में गौकाष्ठ मशीन उपलब्ध करवाई गई है। सभी सामाजिक संगठनों एवं आम जन से गौकाष्ठ को अधिक से अधिक इसे उपयोग में लेने की अपील की है।

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