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अजमेर बना उद्यमिता का केंद्र: युवा शक्ति के साथ स्वावलंबन का शंखनाद

अजमेर बना उद्यमिता का केंद्र: युवा शक्ति के साथ स्वावलंबन का शंखनाद

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय

अजमेर से जागा आत्मनिर्भरता का संकल्प-युवा उद्यमिता यात्रा का हुआ भव्य शुभारंभ

अजमेर बना उद्यमिता का केंद्र: युवा शक्ति के साथ स्वावलंबन का शंखनाद

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का युवाओं को उद्यमिता अपनाने का आह्वान

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के स्वराज सभागार में बुधवार को युवा उद्यमिता यात्रा का भव्य शुभारंभ हुआ। स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के संयुक्त तत्वावधान तथा स्टीफन कॉलेज किशनगढ़ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने युवाओं के भीतर आत्मनिर्भरता, नवाचार और उद्यमिता की नई चेतना का संचार किया।

उद्यमिता ही आत्मनिर्भर भारत की कुंजी : देवनानी

मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि उद्यम स्थापित करने की क्षमता हर युवा में विद्यमान है, आवश्यकता केवल उस क्षमता को पहचानने और सही मानसिकता विकसित करने की है। उन्होंने कहा कि भारत के गांव कभी आत्मनिर्भर हुआ करते थे, जहां हर व्यक्ति किसी न किसी उत्पादन से जुड़ा था, लेकिन विदेशी शासन के प्रभाव से यह व्यवस्था कमजोर हुई।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे नौकरी पाने की मानसिकता से बाहर निकलकर रोजगार देने वाले बनें। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सशक्त बनाना ही सच्चा विकास है और इस सोच के केंद्र में युवा शक्ति है।

देवनानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत नई दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां युवा जनसंख्या देश की सबसे बड़ी ताकत है। युवा वर्तमान को गढ़ते हुए भविष्य का निर्माण करते हैं, इसलिए राष्ट्रीय भक्ति को आर्थिक शक्ति में बदलना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें भारतीय गौरव, परंपरा और कौशल को महत्व दिया गया है, जिससे युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित होगी। उन्होंने कहा कि भारत में संसाधनों की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें युग के अनुरूप दिशा देने की है।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवनशैली के अनुरूप उद्यमिता न केवल आर्थिक उन्नति का माध्यम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार सृजन का भी आधार है। “युवा उद्यमिता यात्रा” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिससे जुड़कर युवा अपने कर्मों से परिवर्तन लाएं और इतिहास रचें।

स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संगठक सतीश कुमार ने अपने विचारों से कार्यक्रम को दिशा दी। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय संगठक निम्बा राम ने प्रेरक मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री राधेश्याम चोयल ने युवा उद्यमिता यात्रा की संकल्पना को विस्तार से रखते हुए इसे एक संगठित सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का अभियान बताया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी की तलाश में नहीं, बल्कि अपने सपनों को साकार करने की क्षमता रखता है। आवश्यकता है सही मार्गदर्शन और सशक्त मंच की। 

उन्होंने बताया कि यह यात्रा युवाओं को केवल प्रेरित नहीं करेगी, बल्कि उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण, वित्तीय मार्गदर्शन, कौशल विकास और बाजार से जोड़ने का संपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। यह पहल एक ऎसे इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में कदम है, जहां युवा अपने विचारों को वास्तविक उद्यम में बदल सकें।

स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संगठक सतीश कुमार ने अपने उद्बोधन में युवाओं को सोच के स्तर पर परिवर्तन का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में सभी के लिए नौकरी उपलब्ध होना संभव नहीं है, इसलिए युवाओं को अपने भीतर की क्षमता को पहचानकर स्वरोजगार और उद्यमिता को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि रोजगार का अर्थ केवल नौकरी नहीं, बल्कि अपनी क्षमता से आर्थिक सृजन करना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत को शून्य बेरोजगारी की दिशा में आगे बढ़ाने में उद्यमिता सबसे प्रभावी माध्यम है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बा राम ने अपने उद्बोधन में भारतीय समाज की परंपरागत आत्मनिर्भर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में कभी बेरोजगारी जैसी स्थिति नहीं थी, क्योंकि हर व्यक्ति किसी न किसी उत्पादक कार्य से जुड़ा रहता था। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपने आसपास उपलब्ध संसाधनोंजैसे कृषि, जड़ी-बूटियां एवं स्थानीय कौशल को पहचानें और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़कर नए उद्यम विकसित करें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा लर्न अर्न एंड परफॉर्म जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

युवा उद्यमिता यात्रा को राजस्थान के विभिन्न जिलों में आयोजित किया जाएगा, जहां हजारों युवाओं को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण, मेंटरशिप एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। चयनित युवाओं को बूट कैंप और निरंतर हैंडहोल्डिंग के माध्यम से उनके उद्यम स्थापित करने में सहायता दी जाएगी। यह पहल एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक आंदोलन के रूप में उभरते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस अवसर पर लोकेंद्र नरूका, डॉ. संत कुमार, डॉ. कुलदीप सिंह, बलराज, राकेश, डॉ. ज्योति वर्मा सहित विभिन्न गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के प्रो. शिव प्रसाद, प्रो. अरविंद पारिक, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. ऋतु माथुर, प्रो. सुब्रत दत्ता, वित्त नियंत्रक नेहा शर्मा, कुलदीप सिंह शेखावत, संघ के विभाग प्रचारक श्री शिवराज एवं अजमेर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।

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