बार बार कंधा उतर जाने से पीड़ित की मित्तल हॉस्पिटल में हुई सफल सर्जरी
ऑर्थोस्कोपिक सर्जन डॉ. अरुण राजपुरोहित ने की बैंकार्ट रिपेयर सर्जरी
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। बार बार कंधा उतर जाने की समस्या से पीड़ित अजमेर के कुचील क्षेत्र स्थित ग्राम चीता खेड़ा निवासी एक युवक का मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में आॅर्थोस्कोपिक सर्जन डॉ अरुण राजपुरोहित ने न्यूनतम इनवेसिव आॅर्थोपेडिक प्रक्रिया से दूरबीन द्वारा ऑपरेशन किया । युवक को उपचार के तीसरे दिन हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ अरुण राजपुरोहित ने बताया कि युवक बार बार कंधे के डिस्लोकेशन की समस्या से लंबे समय से पीड़ित था। रोगी ने रूढ़िवादी उपचार किए किन्तु कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ। स्थाई उपचार के लिए हॉस्पिटल आने पर उसे बैंकार्ट सर्जरी के बारे में बताया गया। युवक को दूरबीन के जरिए की जाने वाली इस न्यूनतम इनवेसिव आॅर्थोपेडिक प्रक्रिया के बारे में सभी जानकारी दी गई एवं आवश्यक जांचें कराई गई। बताया गया कि इस सर्जरी में उसके कंधे पर किसी तरह का चीरा अथवा घाव नहीं होगा। दूरबीन के जरिए बिना रक्त बहाए यह सर्जरी की जा सकेगी। रोगी द्वारा सर्जरी के लिए सहमति देने पर उसका उपचार किया गया।
डॉ अरुण राजपुरोहित ने बताया कि बैंकार्ट रिपेयर सर्जरी अजमेर के मित्तल हॉस्पिटल में पहली बार की गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह के उपचार के लिए लोग अब तक अजमेर से बाहर जाया करते हैं। अब मित्तल हॉस्पिटल में ही कंधे व घुटने की दूरबीन से सर्जरी सफलता से की जा रही है। राज्य एवं केंद्र सरकार की योजना में इस तरह की सर्जरी का लाभ लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पीड़ित युवक को इस सर्जरी की सलाह देने का मुख्य उद्देश्य कंधे के जोड़ में स्थिरता बहाल करना था। जिससे मरीज पूरी तरह से गति कर सकें और अव्यवस्था के डर के बिना अपनी सामान्य गतिविधियों में वापस आ सकें। उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह सर्जरी ओपन बैंकार्ट एवं आर्थोस्कोपिक दोनों ही रूप से की जाती है यह मरीज की चोट और उसकी स्थिति देखने के बाद सुनिश्चित किया जाता है। किन्तु दूरबीन के जरिए की जाने वाली सर्जरी से ऊतक क्षति कम होती है और मरीज को तेज़ी से रिकवरी होती है।
डॉ राजपुरोहित ने छुट्टी देने से पहले मरीज को सभी आवश्यक सलाह प्रदान की जिससे मरीज के हाथ का मूवमेंट भी बना रहे और उसे दैनिक जीवन में बाधा नहीं आए।रोगी ने मित्तल हॉस्पिटल में मिली सेवाओं को श्रेष्ठ बताया उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के चिकित्सक एवं नर्सिंग कर्मचारियों का मरीज के प्रति बहुत संवेदनशील व्यवहार रहता है। हॉस्पिटल में उपचार के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

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