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अजयमेरू प्रेस क्लब में दिलचस्प वाद-संवाद संपन्न

अजयमेरू प्रेस क्लब में दिलचस्प वाद-संवाद संपन्न

अजयमेरू प्रेस क्लब में दिलचस्प वाद-संवाद संपन्न

पटेल भी नेहरू जितने काबिल थे मगर गांधी

का विश्वास नेहरू के साथ था

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल दोनों परम देशभक्त होने के साथ साथ भारतीय हितों के रक्षक थे किन्तु देश के प्रथम प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में पटेल इसलिये नेहरू से पिछड़ गये क्योंकि नेहरू को महात्मा गांधी का विश्वास प्राप्त था हालांकि सरदार पटेल को कांग्रेस की प्रांतीय कार्यसमितियों के बहुमत का समर्थन हासिल था । 

अजयमेरू प्रेस क्लब में, देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू क्यों, पटेल क्यों नहीं, विषय पर आयोजित एक दिलचस्प संवाद में सुप्रसिद्ध अभिभाषक एवं पूर्व जिला प्रमुख सत्य किशोर सक्सेना ने नेहरू की ओर से तथा मीडिया इन्फ्लूएंसर एवं पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व महाप्रबन्धक वेद माथुर ने सरदार पटेल के समर्थन में वक्तव्य दिया। 

अभिभाषक सत्यकिशोर सक्सेना ने कहा,नेहरू और पटेल दोनों ही असाधारण योग्यता वाले, “बॉर्न टू रूल” श्रेणी के नेता थे। दोनों व्यक्तित्व “औसत से ऊपर की श्रेणी” के उदाहरण थे, जिनकी सोच घटनाओं से ऊपर, विचारों के स्तर पर थी किन्तु उनके बीच प्रतिस्पर्धा से अधिक परस्पर सम्मान का संबंध था। गांधीजी द्वारा नेहरू को प्रधानमंत्री के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय परिस्थितिजन्य और दूरदर्शितापूर्ण था। उन्होंने कहा, नेहरू बनाम पटेल विवाद को ऐतिहासिक संदर्भ, तत्कालीन चुनौतियों और नेतृत्व की विभिन्न प्राथमिकताओं के परिप्रेक्ष्य में समझना चाहिए। कश्मीर मुद्दे पर नेहरू के पक्ष का समर्थन रखते हुए उन्होंने कहा,पटेल का कहना था कि काशमीर अगर मिले तो पूरा मिले अन्यथा मिले ही नहीं। ऐसे में पूरा काशमीर भारत के हाथ से जा भी सकता था। नेहरू ने काश्मीर को बफर स्टेट की तरह सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण समझते हुए काशमीर का जो हिस्सा बगैर विवाद के मिल रहा था उसे लेने में देश का हित समझा। उन्होंने कहा नेहरू ने भारत के स्वरूप एवं इसकी परिस्थितियों के अनुरूप विकास का ढांचा खड़ा किया। देश के लिये लोकतांत्रिक समाजवाद एवं पंचवर्षीय योजनाओं की परिकल्पना ही भारत के वर्तमान विकास का आधार बनी। उन्होंने कहा नेहरू के वय्क्तिगत सम्बन्धों के कारण बहुत से अन्य देशों से भारत के अच्छे सम्बन्ध बने। 

वेद माथुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि 1946 में कांग्रेस कार्यसमितियों का सम्पूर्ण बहुमत पटेल के पक्ष में होने के बावजूद नेहरू को नेता चुने जाने का महात्मा गांधी का वीटो अलोकतांत्रिक था। अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और अन्य समकालीन नेताओं के विचारों का उल्लेख करते हुए करते हुए कहा कि नेहरू के नेता के रूप में चयन का कई प्रमुख नेताओं ने खुल कर विरोध किया मगर इनकी चलने नहीं दी गई। उन्होंने कहा, नेहरू के पक्ष में गांधी के जो संभावित तर्क बताए गये थे वे थे, नेहरू की अपेक्षाकृत कम आयु, मुस्लिम समुदाय में उनकी लोकप्रियता, तथा अंग्रेजों के साथ होने वाले वार्तालाप में उनकी उपयोगिता। किन्तु उन्होंने कहा ये तर्क बेमानी थे। नेहरू की गलत रीति नीति के कारण ही देश के विकास की आधारशिला ही गलत रखी गई। पटेल उनकी अपेक्षा अधिक मजबूत और दृढनिश्चयी प्रशासक से। हैदराबाद, जूनागढ और काश्मीर का भारत में विलय उनकी दृढता का ही परिणाम था। नेहरू की तुष्टिकरण की नीतियों ने देश को कमजोर बनाया। 

सुप्रसिद्ध कवि रासबिहारी गौड़ ने सत्र का माडरेशन किया। आरम्भ में क्लब के अध्यक्ष डा. रमेश अग्रवाल ने स्वागत किया। महासचिव सी.पी.कटारिया नें आभार व्यक्त किया। प्रताप सनकत ने व्यवस्थाओं का संचालन किया। कार्यक्रम में पद्मश्री सी.पी. देवल, शहर कांगेस के पूर्व अध्यक्ष महेन्द्रसिंह रलावता, श्री डी.एल.त्रिपाठी, साहित्यकार उमेश चौरसिया, डा. ब्रजेश माथुर, शमेन्द्र जड़वाल महिला लेखिका मंच की अध्यक्ष मधु खन्डेलवाल सहित नगर के अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।  

ये भी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सैयद सलीम व सुदेश शर्मा ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर अजयमेरू प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष राजकुमार पारीक, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण जाला, सचिव अब्दुल सलाम कुरैशी, हेमंत  शर्मा, अनुराग जैन, रामगोपाल सोनी, शरद कुमार शर्मा, उमेश कुमार चौरसिया, ललित कुमार शर्मा, संजीव वशिष्ठ, सुनीता जैन, महादेव कर्मवानी, आई. सी. पाठक व सुभाष चांदना सहित क्लब के अनेक सदस्य उपस्थित थे।

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