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महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर मे महर्षि दयानन्द की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर मे महर्षि दयानन्द की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर मे महर्षि दयानन्द की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन


महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्श आज भी राष्ट्र निर्माण की दिशा देते हैं  : मुरलीधर


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती के उपलक्ष्य में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ विचारक एवं चिंतक मुरलीधरजी ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती का जीवन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के लिए पूर्ण समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण समाज सुधार, राष्ट्र जागरण और वेदों के पुनर्जागरण के लिए समर्पित किया तथा “वेदों की ओर लौटो” का संदेश देकर भारतीय समाज को नई दिशा प्रदान की। अपने उद्बोधन में श्री मुरलीधर ने बताया कि किसी भी महापुरुष को समझने के लिए उसके जीवन, उसके विचारों और उसके द्वारा दी गई दिशा को वर्तमान परिस्थितियों में लागू करने की आवश्यकता होती है। स्वामी दयानंद ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव तथा सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध संघर्ष करते हुए नारी शिक्षा, विधवा विवाह, स्वदेशी, स्वभाषा तथा समानता के सिद्धांतों को बल दिया। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना कर सामाजिक जागरण का व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया। श्री मुरलीधर ने कहा कि स्वामी दयानंद ने केवल धार्मिक सुधार ही नहीं किए, बल्कि स्वतंत्रता चेतना जगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचारों से प्रेरित होकर अनेक क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों ने राष्ट्र निर्माण के कार्य में सक्रिय योगदान दिया। उन्होने अपने वक्तव्य मे कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि वे स्वामी दयानंद के सत्य, कर्म और राष्ट्रनिष्ठा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय महर्षि दयानंद की ऋषि-दृष्टि को व्यवहार में उतारते हुए शिक्षा, शोध और संस्कार आधारित वातावरण के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में प्रतिदिन गायत्री मंत्र के प्रसारण की व्यवस्था पूरे परिसर में लागू की गई है, जिससे विद्यार्थियों में सकारात्मकता और मानसिक संतुलन का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में अतिथियों को सत्यार्थ प्रकाश भेंट करने की परंपरा भी प्रारंभ की गई है तथा महर्षि दयानंद शोधपीठ और चेयर के माध्यम से वैदिक अध्ययन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कुलगुरु ने पर्यावरण विभाग से वेद-आधारित पारिस्थितिकी, यज्ञ और हवन के वैज्ञानिक पक्ष पर शोध परियोजनाएँ तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने जानकारी दी कि सभी विद्यार्थियों के लिए महर्षि दयानंद पर एक क्रेडिट का पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है तथा सरकार द्वारा विश्वविद्यालय में महर्षि दयानंद सरस्वती पैनोरमा निर्माण का निर्णय भी लिया गया है।

इस अवसर पर महर्षि दयानंद शोधपीठ की निदेशक एवं दयानंद चेयर की प्रभारी आचार्य प्रो. ऋतु माथुर ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि महर्षि दयानंद ने अपने वैदिक ज्ञान और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से भारतीय नवजागरण को नई दिशा दी। उनका संदेश “वेदों की ओर लौटो” केवल धार्मिक आह्वान नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का सशक्त उद्घोष था। उन्होंने शोधपीठ की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर शोधपीठ द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में लगभग 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में हिंदी विभाग की निधि शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि महेंद्र कुमार गोदारा, तनिष्का मावलिया एवं मिहिर गुर्जर (वनस्पति शास्त्र विभाग), साक्षी खत्री एवं शाहीन (हिंदी विभाग) तथा राहुल यादव (पर्यावरण विज्ञान विभाग) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में जगदीश जी राणा, खाजु लाल चौहान तथा अशोक सहित प्रो अरविंद पारीक,प्रो सुभाष चंद्र, प्रो शिव प्रसाद ,प्रो सुब्रोतो दत्ता, डॉ राजू शर्मा , डॉ लारा शर्मा, डॉ जयंती डॉ सूरजमल राव एवं डॉ सुनील टेलर उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव श्री कैलाश चंद्र शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक शर्मा ने किया

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