विराट हिन्दू सम्मेलन के समापन पर उमड़ा जनसैलाब
संतों के सान्निध्य में विशाल
धर्मसभा, समरसता भोज ने दिया एक पंगत–एक संगत का संदेश
समरसता ही राष्ट्र निर्माण की नींव : हनुमान सिंह राठौड़
विराट सम्मेलन ने संस्कृति, संगठन और सनातन चेतना को दी नई ऊर्जा : ओमप्रकाश भड़ाना
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। सकल हिन्दू समाज एवं विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति गुर्जर धरती बस्ती अजयमेरू महानगर के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य समापन रविवार को संतों के सान्निध्य में विशाल धर्मसभा एवं समरसता भोज के साथ हुआ। समापन समारोह में मातृशक्ति सहित हजारों श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भागीदारी देखने को मिली।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रिय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि यह सम्मेलन हिन्दू समाज को एकजुट करने, सांस्कृतिक चेतना जागृत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त अभियान है।
उन्होंने संतों के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए कहा कि इस विराट आयोजन का उद्देश्य हिन्दू समाज में नव चेतना, जनजागरण एवं सामाजिक एकता को मजबूती प्रदान करना है। समरसता भोज के माध्यम से एक पंगत–एक संगत का संदेश पूरे समाज तक पहुँचाया गया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को जोड़ने वाला सबसे बड़ा माध्यम सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक संस्कार हैं। ऐसे विराट आयोजन हिन्दू समाज को अपनी मूल परंपराओं से जोड़ते हुए संगठन, सेवा और संस्कार के भाव को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज एक साथ बैठकर एक पंगत में भोजन करता है और एक संगत में प्रभु स्मरण करता है तब सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है। ये राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम है।
श्री श्री 1008 महंत सुरेश दास महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि सनातन धर्म आस्था के साथ जीवन को मर्यादा, सेवा और करुणा से जोड़ने वाली महान परंपरा है। उन्होंने कहा कि ऐसे विराट आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है और संगठन की शक्ति से समरसता का भाव सुदृढ़ होता है। महंत श्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संस्कार, सेवा और धर्म को आत्मसात कर राष्ट्र व समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएं।
अखिल भारतीय सांगलिया पीठ सीकर के पीठाधीश्वर श्री श्री 108 ओमदास जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म समाज को जोड़ने वाला जीवन दर्शन है जो भेदभाव मिटाकर सभी को एक सूत्र में बांधता है। उन्होंने कहा कि संगठन के माध्यम से ही समाज की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहती है और समरसता के भाव से राष्ट्र सशक्त बनता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए समाज को एकता के मार्ग पर आगे बढ़ाएं।
देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के सदस्य ओमप्रकाश भड़ाना ने कहा कि सम्मेलन का शुभारम्भ धर्म ध्वजारोहण के साथ किया गया। इसके पश्चात अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ स्थल सवाई भोज आसींद के महंत श्री श्री 1008 महंत सुरेश दास महाराज एवं अखिल भारतीय सांगलिया पीठ सीकर के पीठाधीश्वर श्री श्री 108 ओमदास जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य कलश यात्रा, शोभा यात्रा एवं विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का यह विराट आयोजन सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण, हिन्दू समाज में नव चेतना के संचार तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक गौरव और संगठनात्मक शक्ति का संदेश प्रसारित किया।
धर्मसभा में उपस्थित संत–महात्माओं ने हिन्दू समाज को धर्म, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और संगठन की शक्ति का महत्व समझाते हुए समाज को एक सूत्र में बांधने का आह्वान किया।
कलश यात्रा में हजारों की संख्या में मातृशक्ति ने सहभागिता की। ये रेलवे म्यूजियम स्थित माता जी मंदिर से प्रारम्भ होकर अलवर गेट, गुर्जर टीला, गुर्जर धरती, नोनकरण का हत्था होते हुए तेल मिल होते हुए विभिन्न मार्गों से होती हुई नसीराबाद रोड स्थित तेल मिल स्थित मुख्य कार्यक्रम धर्म सभा स्थल पर पहुँची। वहां पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में 3 हज़ार से अधिक धर्म प्रेमियों ने सहभागिता की
शोभा यात्रा में विभिन्न आकर्षक झांकियाँ, धर्म ध्वज, भजन मंडलियाँ एवं श्रद्धालुओं की विशाल भागीदारी श्रद्धा और संस्कृति का भव्य संगम प्रस्तुत करती रही।
मातृशक्ति के रूप में श्रीमती पुष्पा पोसवाल ने सशक्त महिला , समृद्ध महिला का संदेश दिया
आयोजन समिति के अध्यक्ष पूरण सिंह डांगोरिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समरसता भोज महाप्रसादी का आयोजन किया गया। इसमें समाज के सभी वर्गों ने एक साथ पंगत में बैठकर भोजन ग्रहण कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया।


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