क्षय रोग निरोधी उपचार उपलब्ध
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। सरकार द्वारा क्षय रोग (टीबी) के निदान के लिए जांच उपरान्त उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
जेएलएन चिकित्सालय श्वसन रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि भारत देश में टीबी (क्षयरोग) संक्रमित नागरिकों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है। इनमें से 5 से 10 प्रतिशत लोगों को यह रोग संक्रमण लेने के दो साल के भीतर हो जाता है। टीबी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में 70 प्रतिशत ऐसे नागरिक हैं जिनके परिवार के सदस्य भी इस रोग से ग्रसित हैं।
उन्होंने बताया कि इन टीबी संक्रमित व्यक्तियों को टीबी रोग पनपने से रोकने के लिए (बचाव) राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय क्षय रोग निरोधी उपचार उपलब्ध है। टीबी संक्रमण पहचानने के लिए टीबी स्किन टेस्ट तथा टीबी गोल्ड टेस्ट उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि संक्रमण की संख्या अधिक होने के कारण यह टेस्ट प्राथमिक तौर पर उन आबादी पर किया जाता है जिन्हें क्षय रोग होने की संभावना अधिक है इनमें मुख्य तौर पर एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, क्षय रोग से ग्रसित व्यक्तियों के परिजन (जिनमें 5 साल के बच्चे भी शामिल हैं), डायलिसिस डायलिसिस के रोगी, डायबिटीज़ के रोगी, ट्रांसप्लांट रोगी आदि शामिल है।
उन्होंने बताया कि इस संक्रमण को रोग में पनपने से बचाव के लिए दो तरह के उपचार है। छह महीने तक प्रतिदिन टेबलेट आईसोनाईजिड उम्र व वजन के आधार पर अभी प्रचलन में है। अन्य उपचार टेबलेट आईसोनाईजिड तथा टेबलेट रिफापेनटिन रेजीम का हैं। इसमें व्यक्ति को यह दवा सिर्फ तीन महीने के लिए दी जाती है और वो भी सप्ताह में एक बार।
उन्होंने बताया कि जिस परिवार में क्षयरोग से ग्रसित व्यक्ति है उन्हें कार्यक्रम के तहत उपरोक्त जाँच उपरांत दी जाने वाली दवाएँ अवश्य लेनी चाहिए अन्यथा यह संक्रमण गंभीर रोग का रूप धारण कर सकता है। वर्तमान में अजमेर जिले के संक्रमित व्यक्तियों को बचाव हेतु यह उपचार दी जा चुकी है। यह प्रक्रिया बचाव के अलावा देश से टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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