हार्ट व श्वास रोगी के गुर्दे से 80 मिलीमीटर बड़ी पथरी निकाली
मित्तल हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ सन्तोष धाकड़ ने की चुनौती पूर्ण सर्जरी
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। अजमेर के निकटवर्ती कस्बे सुरसुरा के ग्राम थल निवासी एक गंभीर रूप से बीमार हार्ट एवं श्वास रोगी के लिए मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। रोगी के गुर्दे में पिछले करीब 15 वर्षों से मौजूद अत्यंत विशाल (करीब 70–80 मिलीमीटर) पथरी को जटिल एवं जोखिम पूर्ण सर्जरी के माध्यम से सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।
यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार धाकड़ के नेतृत्व में संपन्न हुआ। लंबे समय से किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे इस मरीज को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ रहा था। देश के विभिन्न अस्पतालों में उपचार के प्रयास किए गए, लेकिन हार्ट और श्वास संबंधी जटिलताओं के कारण सर्जरी को बार-बार टाल दिया जाता रहा।
डॉ. धाकड़ ने बताया कि रोगी के परिजन प्रारंभ में केवल परामर्श के लिए मित्तल हॉस्पिटल पहुंचे थे। प्रारंभिक जांचों में यह सामने आया कि मरीज के गुर्दे में किडनी के आकार की ही अत्यंत बड़ी पथरी विकसित हो चुकी है, जो लगातार पीड़ा का कारण बन रही थी। हार्ट और श्वास संबंधी परीक्षणों के बाद विशेषज्ञ टीम ने जोखिम का आकलन कर सर्जरी का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) को नियंत्रित करते हुए किडनी को सुरक्षित रखना था। लगभग डेढ़ से दो घंटे चली सर्जरी में चिकित्सकों ने कुशलता से पथरी को निकालते हुए गुर्दे को सुरक्षित बचा लिया। यदि यह सर्जरी सफल नहीं होती, तो मरीज की पूरी किडनी निकालने की नौबत आ सकती थी।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है। वह अब सामान्य रूप से भोजन कर रहा है, चल-फिर रहा है और स्वस्थ महसूस कर रहा है। अस्पताल से छुट्टी के समय मरीज और उसके परिजनों के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी।
गौरतलब है कि मित्तल हॉस्पिटल में हार्ट, न्यूरो, नेफ्रो, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सहित सभी सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। यही कारण है कि जटिल से जटिल सर्जरी के लिए भी अब मरीजों को बड़े महानगरों का रुख करने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।

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