अद्वैत दर्शन और भक्ति परंपरा से सुदृढ़ होगी राष्ट्रीय एकता : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल
अजमेर (अजमेर मुस्कान) । महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में वैशाख मास शुक्ल पक्ष पंचमी के पावन अवसर पर जगद्गुरु आदि शंकराचार्य एवं महान संत कवि सूरदास की जयंती के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल रहे।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के माध्यम से भारतीय दर्शन को एकता और समरसता का आधार प्रदान किया। उनका सिद्धांत “ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या” केवल आध्यात्मिक विचार नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। उन्होंने अल्पायु में संपूर्ण भारत की यात्राएं कर चारों दिशाओं में मठों की स्थापना करते हुए राष्ट्र को सांस्कृतिक सूत्र में बांधने का कार्य किया, जो आज भी प्रेरणास्रोत है।
प्रो. अग्रवाल ने संत सूरदास के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी रचनाओं ने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया और समाज में प्रेम, समर्पण एवं संवेदनशीलता का संदेश दिया। ‘सूरसागर’ के माध्यम से उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं का ऐसा भावपूर्ण चित्रण किया, जिसने भारतीय संगीत और साहित्य को अमूल्य धरोहर प्रदान की।
कुलगुरु ने कहा कि वर्तमान समय में आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और सूरदास की भक्ति परंपरा, दोनों ही समाज में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक जागरूकता को सुदृढ़ करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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