अजयमेरु प्रेस क्लब की मासिक साहित्यिक गोष्ठी साहित्य धारा का हुआ आयोजन
विविध विधाओं की रचनाओं का किया पाठ
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। अजयमेरु प्रेस क्लब की मासिक साहित्यिक गोष्ठी साहित्य धारा में इस बार विविध विधाओं की रचनाओं का पाठ किया गया।
अध्यक्षता कर रहे शायद तस्दीक अहमद ने अपनी गजल के यह नवाजिश है मेरे यारों की यूं ना वह बदगुमान होता है जैसे बेहतरीन शेर पढ़े। क्लब अध्यक्ष डॉ रमेश अग्रवाल ने अपने चित्र परीक्षित अंदाज में शराब पीने की मजबूरी व्यंग्य सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। सुनीता जैन के प्रभावी संचालन से सजी इस महफिल में संयोजक उमेश कुमार चौरसिया ने मन को छूने वाली लघु कथा सुनाई। पायल गुप्ता ने स्त्री है कविता में महिला की स्थिति का संवेदनशील चित्रण किया। डॉ बृजेश माथुर ने मधुर स्वर में कोई दूर रहकर भी पास होता है, खलील अहमद ने अश्क मेरी आंखों का मुझसे यूं कहता है गजल और मोहम्मद इलियास हाशमी ने नया साल मनाएं एवं विजय कुमार शर्मा ने जय दादा परशुराम गीत सुनाए।, अब्दुल सलाम कुरैशी ने शकूर अनवर की गजल पढ़ी। रजनीश मैसी ने गुनाह इतना बढ़ गया जहां गजल, कुलदीप खन्ना ने मेरी खुशियां हो तुम, पुष्पा क्षेत्रपाल ने सिलेंडर का संकट, सुधा मित्तल ने भरोसा नहीं है, युवा कवि कुणाल ने जिंदगी के फलसफे, दीपशिखा ने ना कहना, जय गोपाल ने पिया बन जाओ, मुकेश आर्य ने यह कहा आ गया मैं, अनीता यादव ने मेरी यादें रचनाएं सुनाई। अंत में सत्यनारायण जाला ने धन्यवाद दिया।

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