Ticker

6/recent/ticker-posts

सिंधु शोधपीठ के तत्वावधन मे आयोजित हुई गोष्ठी

सिंधु शोधपीठ के तत्वावधन मे आयोजित हुई गोष्ठी

एक पुष्प की अभिलाषा’ से जागी राष्ट्र चेतना : एमडीएसयू की संगोष्ठी में देशभक्ति का सशक्त संदेश

सिंधु शोधपीठ के तत्वावधन मे आयोजित हुई गोष्ठी


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के सिंधु शोध केंद्र द्वारा महान राष्ट्रकवि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पावन जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष संगोष्ठी में साहित्य, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक दायित्व का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। “एक पुष्प की अभिलाषा” विषय पर केंद्रित इस गोष्ठी ने उपस्थित विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को गहन चिंतन के साथ-साथ व्यावहारिक प्रेरणा भी प्रदान की। स्वागत उद्बोधन एवं विषय प्रवर्तन करते हुए अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं निदेशक सिंधु शोधपीठ प्रो सुभाष चन्द्र ने कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के सशक्त स्वर और राष्ट्र चेतना के अग्रदूत थे। उनकी लेखनी में त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है, जो आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान समय में जब समाज तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब माखनलाल चतुर्वेदी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी रचनाएं युवाओं को न केवल प्रेरित करती हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनने का मार्ग भी दिखाती हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ से पधारे डॉ. विजय शंकर शर्मा ने अपने विस्तृत एवं प्रभावशाली वक्तव्य में कविता “एक पुष्प की अभिलाषा” का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह कविता केवल एक पुष्प की कल्पना नहीं, बल्कि एक ऐसे आदर्श नागरिक की अभिलाषा है, जो व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर राष्ट्रहित में समर्पित हो जाता है। उन्होंने बड़े रोचक और सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि पुष्प अपनी विभिन्न संभावनाओं—जैसे सुंदरी के श्रृंगार में स्थान पाना, देवताओं को अर्पित होना या किसी सम्राट के सम्मान का प्रतीक बनना—को त्यागकर उस मार्ग पर बिछने की इच्छा रखता है, जहां से देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर गुजरते हैं। यह भाव त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि देशभक्ति केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, ईमानदारी से कर देना, संसाधनों की बचत करना और अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करना भी देशभक्ति के महत्वपूर्ण रूप हैं।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने संदेश में प्रत्येक व्यक्ति अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। उन्होंने युवाओं को रोजगार के सीमित अवसरों के बीच कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। हर व्यक्ति को अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे विकसित करना चाहिए, क्योंकि यही राष्ट्र की प्रगति का आधार बनती है। राष्ट्रीयता का प्रदर्शन केवल बड़े कार्यों से ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे व्यवहारों से भी किया जा सकता है—जैसे स्वच्छता बनाए रखना, अनुशासन का पालन करना और समाज के प्रति संवेदनशील रहना।

मंच संचालन का दायित्व डॉ. अंजू अग्रवाल ने निभाया और इस अवसर पर सदस्य सचिव दिलीप शर्मा, नेमी चंद  तंबोली, डॉ. अंजू वर्मा अतिथि संकाय एवं शोधार्थियों में शिखा सोनी, पंकज यादव, कंचन तथा निकिता कुंडू सहित अन्य विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ