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नई शिक्षा दृष्टि की ओर अग्रसर एमडीएस विश्वविद्यालय : अंग्रेजी एवं संस्कृत में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम होंगे प्रारम्भ

नई शिक्षा दृष्टि की ओर अग्रसर एमडीएस विश्वविद्यालय : अंग्रेजी एवं संस्कृत में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम होंगे प्रारम्भ

नई शिक्षा दृष्टि की ओर अग्रसर एमडीएस विश्वविद्यालय : अंग्रेजी एवं संस्कृत में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम होंगे प्रारम्भ

कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल का दूरदर्शी निर्णय, विद्यार्थियों को मिलेगा वैश्विक एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वित लाभ

वर्तमान सत्र से शुरू होंगे अंग्रेजी एवं संस्कृत विषयों में पीजी पाठ्यक्रम, रोजगार, शोध एवं प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के नए अवसर खुलेंगे

विद्यार्थियों की मांग एवं बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर  के कुलगुरु प्रो.सुरेश कुमार अग्रवाल  द्वारा विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय में अंग्रेजी एवं संस्कृत भाषा के अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम वर्तमान शैक्षणिक सत्र से प्रारम्भ किए जाने का निर्णय लिया गया है। कुलगुरु प्रो अग्रवाल के इस निर्णय को नई शिक्षा नीति, वैश्विक शैक्षणिक आवश्यकताओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में अंग्रेजी भाषा वैश्विक संवाद, उच्च शिक्षा, शोध, तकनीकी ज्ञान, प्रशासनिक सेवाओं एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों की प्रमुख भाषा बन चुकी है। वहीं संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति, दर्शन, वेद, उपनिषद, साहित्य एवं प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की मूल आधारशिला है। ऐसे में दोनों विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारम्भ करना विद्यार्थियों के सर्वांगीण बौद्धिक विकास की दिशा में अत्यंत आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो विद्यार्थियों को आधुनिक वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं बौद्धिक विरासत से भी जोड़ सकें। अंग्रेजी एवं संस्कृत दोनों ही विषय शोध, शिक्षण, अनुवाद, प्रशासनिक सेवाओं, मीडिया, साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन तथा अकादमिक क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इन पाठ्यक्रमों के प्रारम्भ होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अन्य शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा तथा स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही विश्वविद्यालय में शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

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