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अजमेर में पारंपरिक जल स्रोतों के सामुदायिक पुनर्जीवन पर बैठक आयोजित

अजमेर में पारंपरिक जल स्रोतों के सामुदायिक पुनर्जीवन पर बैठक आयोजित

अजमेर में पारंपरिक जल स्रोतों के सामुदायिक पुनर्जीवन पर बैठक आयोजित

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। अजमेर में पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक उपायुक्त अनिता चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए सामुदायिक और सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण पर चर्चा की गई।

पार्टिसिपेटरी रिसर्च इन एशिया (पीआरआईए) द्वारा अजमेर में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें शहर के नागरिकों, विद्यार्थियों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं और सिविल सोसाइटी संगठनों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को मिलकर शहर के पारंपरिक जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति के लिए दीर्घकालिक समाधान सोचने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यशाला के दौरान पीआरआईए ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में पारंपरिक जल स्रोतों के पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डाला और अजमेर में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इसमें जनवरी माह में किए गए दो पायलट पुनर्जीवन कार्य भी शामिल थे। इसके बाद प्रतिभागियों ने एक गतिविधि में भाग लिया। इसमें उन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों के महत्व, उनके रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों, संभावित समाधानों और नगर निगम को सहयोग देने में समुदाय व सिविल सोसाइटी की भूमिका पर चर्चा की।

इस कार्यशाला के पश्चात शहर स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता उपायुक्त (प्रशासन) अनीता चौधरी ने की। यह समिति अजमेर में पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और हरित क्षेत्रों के विकास के लिए गठित की गई है। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक संगठनों तथा वार्ड पार्षदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें उद्यान शाखा से अधीक्षण अभियंता श्री मनोहर सोनगरा, स्वच्छ भारत मिशन से सहायक अभियंता बबीता सिंह, सीवरेज विभाग से सहायक अभियंता सर्वेश मीणा एवं कनिष्ठ अभियंता प्रशांत कलूरिया, जल संसाधन विभाग से हिमांशु बलोटिया, जल स्वास्थ्य अभि. विभाग से वरिष्ठ रसायनज्ञ डॉ. एस.पी. वर्मा एवं कनिष्ठ अभियंता प्रतिभा चौहान तथा पर्यटन विभाग से सहायक निदेशक योगेश खत्री शामिल थे। इसके साथ ही वार्ड 62 के वार्ड पार्षद नरेंद्र तुनवाल भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक का उद्देश्य अजमेर के जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए एक सहभागितापूर्ण व्यवस्था विकसित करना था। इसमें समुदाय, सरकारी विभाग और निजी संस्थाएं मिलकर कार्य करें। बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि छात्र नगर निगम के साथ शोध इंटर्नशिप कर सकते हैं। इससे नगर निगम को तकनीकी सहयोग और नए विचार मिलेंगे तथा छात्रों को शहरी प्रशासन और जल प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

बैठक में जल स्रोतों में प्रदूषण, अतिक्रमण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक प्रदर्शनियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जाएगी। जल स्रोतों के पास कचरा फेंकने पर रोक संबंधी सूचना पट्ट लगाए जाएंगे। जल स्रोतों की देखभाल, पौधारोपण और जागरूकता गतिविधियों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त (प्रशासन) ने कहा कि शहर स्तरीय सलाहकार समिति के माध्यम से सभी संबंधित विभागों और हितधारकों को एक मंच पर लाना एक सकारात्मक पहल है। यह जल स्रोतों के सतत पुनर्जीवन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समिति ने यह भी कहा कि एएमआरयूटी 2.0 नीति के अंतर्गत तैयार की जा रही सिटी वाटर एक्शन प्लान में पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन को एक महत्वपूर्ण घटक बनाया जाना चाहिए।

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