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बाबूजी के मंचन ने दर्शकों को भावनाओं के भंवर में बांधा


बाबूजी के मंचन ने दर्शकों को भावनाओं के भंवर में बांधा

लोकनाट्य नौटंकी की संवेदना और कलाकार के संघर्ष को मंच पर किया जीवंत

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। कला जब जीवन के सत्य से टकराती है, तो वह केवल मंचन तक नहीं रह जाती, वह एक अनुभव बन जाती है। ऐसे ही एक अनुभव का साक्षी बना राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली की प्रतिष्ठित रिपर्टरी कंपनी द्वारा राजेश सिंह के निर्देशन में मिथिलेश्वर कहानी पर आधारित नाटक बाबूजी का मंचन रविवार जवाहर रंगमंच पर आयोजित कर दर्शकों को भावनाओं के भंवर में बांध दिया।

बाबूजी नाटक एक तरह से हमारे समाज के हर उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता नजर आया, जो जिन्दगी को अपनी स्वतंत्रता व शर्तों के साथ जीना चाहता है। नाटक का नायक बाबूजी एक ऐसा नायक है जो अपनी जिन्दगी में सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ साथ अपने अंदर के कलाकार को भी जीवित रखना चाहता है। नौटंकी जैसी लोकनाट्य में उसका मन रमता है, पर उसकी इसी नौटंकी के प्रति प्रेम के कारण उसका अपना पारिवारिक जीवन भी बिखर जाता है, पत्नी बेटा उसके अपने साथी व समाज के लोग उसका साथ नहीं देते, उसे अपने ही घर से बाहर कर कर दिया जाता है। इन सब के बावजूद उसका कला के प्रति समर्पण व प्रेम कम नहीं होता, इस पारंपरिक नौटंकी की जीवंतता और लोकनाट्य की आत्मा से सजी यह प्रस्तुति न केवल रंगमंचीय शिल्प का उदाहरण बनी, बल्कि उसने दर्शकों के मन को भीतर तक झकझोर दिया। कभी उदासी की लहर में, कभी स्मृति की गंध में, तो कभी जीवन के कठोर यथार्थ की चुभन में। मंच पर स्वर, शब्द और देहभाषा के माधुर्य ने एक ऐसा संसार रचा, जहां हर दृश्य के साथ भावनाएं बहती रहीं। नाटक का हर एक पात्र हमारे समाज के अलग-अलग व्यक्तियों व तबके की सोच का प्रतिनिधित्व करता नजर आया। हमारे समाज में आज भी एक कलाकार को अपनी जिन्दगी में बहुत ही संघर्ष व् द्वन्द से गुजरना पड़ता है।

नाटक में राजेन्द्र सिंह, सुमन कुमार, शिल्पा भारती, पूजा गुप्ता, मज़िबुर रहमान, विवेक कनौजिया, सत्येन्द्र मलिक, अंकुर सिंह, नवीन सिंह ठाकुर, आलोक रंजन, पोतशंगबम रीता देवी, शिवानी भारतीया, शिव प्रसाद गोंड, बिक्रम लेप्चा, श्याम कुमार सहनी, उत्सव, ताबिश खान, अखिल प्रताप गौतम, हीरालाल रॉय, मधुरिमा तरफदार, पाली फुकन, प्रतीक बढे़रा, मोती लाल खरे, सतीश कुमार, नारायण रमेश पंवार, समीर जीवन रामटेके, कान नाथ, अनंत शर्मा अपनी अभिनय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

समारोह में इस अवसर पर यॉबी जॉर्ज, निरंजन कुमार, राजेन्द्र सिंह, जुम्माखान, उज्जवल मित्रा, वरिष्ठ रंगकर्मी लाखन सिंह, विष्णु अवतार भार्गव, विकल्प सिंह, सहित शहर के रंगकर्मी व कलाप्रेमी उपस्थित थे।

फेस्टिवल नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली, कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन अजमेर तथा अजमेर विकास प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में आधुनिक नाट्य कला संस्थान, आप-हम संस्थान, कला अंकुर, इंडियन लेडीज क्लब, द टर्निंग पॉइंट पब्लिक स्कूल तथा न्यू आदर्श शिक्षा समिति सहयोगी संस्थाओं के रूप में सहभागिता निभा रही हैं।

संयोजक यॉबी जॉर्ज ने बताया कि अजमेर कल 9 मार्च को धर्मवीर भारती का बहुचर्चित नाटक “अंधा युग” का मंचन 7 बजे किया जायेगा। समारोह में निःशुल्क रखा गया है।

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