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माई री मैं का से कहूँ की भावपूर्ण प्रस्तुति

स्त्री की इच्छा, भावनाओं, सामाजिक मर्यादाओं के बीच

स्त्री की इच्छा, भावनाओं, सामाजिक मर्यादाओं के बीच

गहरे द्वंद्व को प्रस्तुत करता एनएसडी रंगमंडल का चर्चित नाटक

माई री मैं का से कहूँ की भावपूर्ण प्रस्तुति

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। जवाहर रंगमंच में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली की प्रतिष्ठित रिपर्टरी कंपनी द्वारा विजयदान देथा की प्रसिद्ध लोककथा श्पहेली पर आधारित नाटक माई री मैं का से कहूं का अत्यंत भावपूर्ण मंचन किया गया। यह प्रस्तुति एनएसडी की हीरक जयंती रंग षष्ठी श्रृंखला के अंतर्गत हुई, जिसका निर्देशन एवं संगीत सुप्रसिद्ध रंगकर्मी अजय कुमार द्वारा किया गया। नाटक में एनएसडी रंगमंडल के कलाकारों द्वारा कथा-गायन और वाचन शैली के माध्यम से कहानी को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस भावपूर्ण प्रस्तुति में सामाजिक मर्यादाओं और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच गहरे द्वंद्व को संवेदनशीलता के साथ मंच पर उतारा, जिसे दर्शकों ने अत्यंत सराहा।

राजस्थान के सुप्रसिद्ध साहित्यकार विजयदान देथा की चर्चित कहानी “दुविधा” पर आधारित नाटक “माई री मैं का से कहूँ” स्त्री की इच्छा, उसकी भावनाओं और सामाजिक मर्यादाओं के बीच चलने वाले गहरे द्वंद्व को प्रस्तुत करता है। कहानी उस सामाजिक विडम्बना को सामने लाती है जहाँ प्रगतिशीलता और समान अधिकारों की बात करने वाले समाज में भी स्त्री को अपनी इच्छाओं और निर्णयों के लिए स्वतंत्रता नहीं मिलती।

नाट्य प्रस्तुति की कहानी में स्त्री के जीवन की उस सच्चाई को उजागर किया गया है जिसमें जन्म से विवाह तक उसके अधिकार माता-पिता के अधीन रहते हैं और विवाह के बाद पति और परिवार के अधीन। उसकी इच्छाएँ, भावनाएँ और स्वतंत्रता समाज की बनाई मर्यादाओं के बीच सीमित हो जाती हैं। इसी सामाजिक यथार्थ को संवेदनशील और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती यह कहानी स्त्री के अस्तित्व और उसकी स्वतंत्रता के प्रश्न को सामने लाती है।

नाटक में शिल्पा भारती, मधुरिमा तरफदार, सत्येन्द्र मलिक, अंकुर सिंह, मज़ीबुर रहमान, सौरभ मेश्रराम, डॉ. अनामिका सागर, पूजा गुप्ता, पोतशंगबम रीता देवी, शिवानी भारती, सुगंधा पांडेय, माधवी शर्मा, विकास गुप्ता, विक्रम लेप्चा, विपिनदेवीदासराव घोबाले, आशुतोष बनर्जी, अश्विनी वर्मा, सुमन कुमार, अदिति आर्या सहित अनेक कलाकार अपनी अभिनय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।  

समारोह का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के स्वागत भाषण से हुआ। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन किया गया इस अवसर पर यॉबी जॉर्ज, निरंजन कुमार, राजेन्द्र सिंह, जुम्माखान, उज्जवल मित्रा, वरिष्ठ रंगकर्मी लाखन सिंह, विष्णु अवतार भार्गव, विकल्प सिंह, सहित शहर के रंगकर्मी उपस्थित थे।

मंत्रालय, भारत सरकार, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली, कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन अजमेर तथा अजमेर विकास प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में आधुनिक नाट्य कला संस्थान, आप-हम संस्थान, कला अंकुर, इंडियन लेडीज क्लब, द टर्निंग पॉइंट पब्लिक स्कूल तथा न्यू आदर्श शिक्षा समिति सहयोगी संस्थाओं के रूप में सहभागिता निभा रही हैं।

संयोजक यॉबी जॉर्ज ने बताया कि अजमेर इतिहास में पहला अवसर है जब नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ओर से चार दिनों तक प्रतिदिन शाम 7 बजे जवाहर रंगमंच पर नाटकों की प्रस्तुति हो रही है। यॉबी जॉर्ज ने आगे बताया कि 8 मार्च को मिथलेश्वर की कहानी पर आधारित नाटक “बाबूजी” प्रस्तुत किया जाएगा। 9 मार्च को धर्मवीर भारती का बहुचर्चित नाटक “अंधा युग” मंचित होगा तथा समारोह के समापन अवसर पर 10 मार्च को महाश्वेता देवी द्वारा लिखित प्रसिद्ध नाटक “बायन” का मंचन किया जाएगा। संयोजक यॉबी जॉर्ज ने बताया कि अजमेर इतिहास में पहला अवसर है जब नेशनल स्कूल आफ ड्रामा की ओर से अजमेर में प्रस्तुतियां दी जा रही है।

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