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चेटीचंड 13 दिवसीय पखवाड़ा महोत्सव : धर्मध्वजा पूजन व संतों के आर्शीवाद से हुआ प्रारम्भ

चेटीचंड 13 दिवसीय पखवाड़ा महोत्सव : धर्मध्वजा पूजन व संतों के आर्शीवाद से हुआ प्रारम्भ

चेटीचंड 13 दिवसीय पखवाड़ा महोत्सव : धर्मध्वजा पूजन व संतों के आर्शीवाद से हुआ प्रारम्भ

जल के बगैर जीवन नहीं है और ज्योति के बगैर मालिक के दर्शन नहीं होते हैं - स्वामी रामप्रकाश

अजमेर पखवाडे़ का नाम देश दुनिया में पहुंच रहा है - महंत श्यामदास उदासीन


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। पूज्य झूलेलाल जयंती समारोह समिति, अजमेर के तत्वावधान में बारहवां चेटीचंड पखवाड़ा महोत्सव 2026 पंचायतों, सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक व शैक्षणिक संगठनों द्वारा 13 मार्च से 25 मार्च तक धार्मिक आयोजनों में होगा। जतोई दरबार, नगीना बाग स्वामी दांदूराम साहिब दरबार ट्रस्ट संस्था द्वारा 21 फुट की आराध्यदेव झूलेलाल मूर्ति पर धर्मध्वजा पूजन, संत महात्माओं के आशीर्वाद व सिंधी भाषा में हनुमान चालीसा के साथ भजनों की प्रस्तुति व महाआरती से हुआ।

कार्यक्रम संयोजक राजेश खटवाणी व राहुल ठारवाणी ने बताया कि श्री बालकधाम सनातन उदासीन मन्दिर  किशनगढ महन्त श्यामदास उदासीन, ईश्वर मनोहर उदासीन अ्राश्रम के संत गौतम सांई, श्रीराम विश्वधाम के सांई अर्जुनदास, श्री ईश्वर गोविंद धाम के स्वामी ईसरदास, निर्मलधाम दरबार के स्वामी आत्मदास, प्रेम प्रकाश आश्रम के स्वामी रामप्रकाश, प्रेम प्रकाश आश्रम आदर्श नगर के दादा नारायणदास, जतोई दरबार के भाई फतनदास, सांई बाबा मन्दिर के ट्रस्टी महेश तेजवाणी, गीता मन्दिर के भाई भीष्म देवजाणी सहित संतों व समाज के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में पखवाड़े के कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

स्वामी रामप्रकाश ने आर्शीवचन देते हुये कहा कि जल व ज्योति की पूजा अर्चना करनी चाहिये। जल के बगैर जीवन नहीं है और ज्योति के बगैर मालिक के दर्शन नहीं होते हैं। हमारे गुरू स्वामी जी सदैव कहते है कि सेवा व सिमरन को जीवन का सार बनाना चाहिये इसके बगैर मानव जीवन सफल नहीं हो सकता।

महंत श्यामदास ने कहा कि पूज्य झूलेलाल जयंती समारोह समिति चेटीचंड पखवाड़ा 2026 के सभी सदस्यों को बहुत-बहुत बधाई शुभकामनाएं आप सभी पर आराध्यादेव झूलेलाल सब की असीम कृपा बनी रहे आप सभी सनातन धर्म की सेवा करते रहे और यह जो उत्सव है बहुत ही आनंद में हो यही हमको परमात्मा से प्रार्थना करते हैं    

जताई दरबार के फतनदास ने कहा कि दरबार में आराध्यदेव झूलेलाल की विशाल प्रतिमा व मन्दिर में पूरे देश विदेश में श्रृद्धालु पूजन करते है। यह ऐतहासिक पखवाड़ा सभी को हर्षोल्लास से मनाना चाहिए तथा साथ ही सेवा के कार्यों में आगे बढ़चढ़कर भाग लेना चाहिए। उन्होने गर्मी प्रारम्भ हो रही है पक्षियों के लिए अपने घर की छतों पर परिन्डे लगाने के साथ गउ माता की भी सेवा करें।

अध्यक्ष कंवल प्रकाश किशनानी ने पखवाड़े कि जानकारी देते हुए बताया कि समारोह समिति द्वारा 13 दिवसीय कार्यक्रम में 32 संस्थाएं मिलकर 39 विभिन्न कार्यक्रम 25 मार्च तक आयोजित कर रही हैं। सबसे प्राचीन सिंधु संस्कृति, सभ्यता व परम्पराओं से युवा पीढ़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है। आराध्यदेव झूलेलाल सिंधु नदी से प्रकट होकर सनातन धर्मियों पर हो रहे अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। शहनाई वादन से अतिथियों का स्वागत किया गया, कार्यक्रम में प्रारंभ में आराध्यदेव झूलेलाल, भगवान हनुमान, स्वामी दांदूराम साहिब व स्वामी होतूराम साहिब के समक्ष दीप-प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सिंधी में हनुमान चालीसा की प्रस्तुति दी गई।

21 झूलेलाल व सनातन मन्दिरों को दिये धर्म ध्वज -

महामंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने बताया कि समारोह में संत महात्माओं द्वारा नवसम्वतसर व चेटीचण्ड के अवसर पर मन्दिरों पर होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में धर्म ध्वजा पूजन कर स्थापित किये जायेगें जिसमें नसरपुर झूलेलाल मन्दिर, नानक का बेडा, श्री शांतानन्द उदासीन आश्रम, पुष्कर  झूलेलाल मन्दिर, हेमू कालाणी चौक, झूलेलाल मन्दिर, जे.पी. नगर, सिन्धू भवन, पंचशील नगर, झूलेलाल मन्दिर, प्रेम प्रकाश मार्ग, वैशाली नगर, गंगेश्वर महादेव मन्दिर, धोलाभाटा, इच्छापूर्ण झूलेलाल मन्दिर,  चांद बावडी, झूलेलाल मन्दिर, अजय नगर, झूलेलाल मन्दिर, साओ बहिराणों केसर गंज, झूलेलाल मन्दिर आशा गंज, पूज्य उद्ेरोलाल मन्दिर, आशा गंज, हासी बाई धर्मशाला के पास, वरूण सागर झील, शिव मन्दिर, डी.आर.एम. ऑफीस, दुख भंजन हालाणी दरबार, प्रकाशेवर महादेव मन्दिर सहित सनातन मन्दिरों के वितरित किये गये। संचालन दिशा किशनानी व प्रकाश जेठरा ने किया। संरक्षक गिरधर तेजवाणी ने स्वागत भाषण व आभार हर्षुल थारवाणी द्वारा व्यक्त किया गया एवं प्रसाद वितरित किया गया।    

संरक्षक के रूप में नरेन शाहणी भगत, हरी चन्दनाणी, नारायणदास थदाणी, कुसुम आर्य, प्रकाश मूलचन्दाणी, दयाल शेवाणी, भगवान चन्दीराम रहेंगे।

        महासचिव महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने बताया कि उपाध्यक्ष पद पर दिशा प्रकाश किशनानी, जगदीश अबीचंदाणी, शंकर बदलानी, प्रकाश जेठरा, नरेन्द्र बसराणी, अजीत पमनाणी, चन्दर नावाणी होगें।  मंत्री पुष्पा साधवाणी, के. टी. वाधवाणी, आसनदास पारवाणी तथा प्रचार मंत्री जयप्रकाश मंघाणी, रमेश एच. लालवाणी, कमल शाहणी, विनोद आसनाणी, सोनू निरंकारी। सोशल मीडिया की जिम्मेदारी अनिल आसनाणी, राजेश किशनाणी, पुरुषोत्तम तेजवाणी, एमटी वाधवानी, शंकर सबलानी को सौंपी गई है।

वित्त समिति में हरकिशन टेकचन्दाणी, जयकिशन लख्याणी, दीपक साधवाणी, मधुष चौधरी, एम. टी. वाधवाणी रहेंगे। स्वागत व सम्मान समिति में महेश ईसराणी, महेश टेकचंदाणी, रमेश वलीरामाणी, मंघाराम भिरयाणी, रमेश टिलवाणी, गोविन्द छतवाणी, चन्द्र रूपाणी, तुलसी सोनी, मनोज भंभाणी, प्रकाश हिंगोराणी, मोहन चेलाणी, मोहन लालवाणी, ईसर भम्भाणी, गोविन्द मनवाणी, प्रेम केवलरामाणी, डॉ. भरत छबलाणी, मोहन तुल्सियाणी, मोहन कोटवाणी, राम केसवाणी, ईश्वर मूलचन्दाणी, कैलाश लखवाणी, राजेश गिदवानी, प्रकाश मूलचंदानी, रमेश परयानी, जय प्रकाश मंघानी, लाल नथानी, राम धनवानी, राजेन्द्र जयसिंघानी, नरेन्द्र बसरानी, जसवंत गनवानी, एच. के. टेकचंदानी, लेखू ठकुर, गिरिश लालवानी, भगवान साधवानी, हशु आसवानी आदि सम्मिलित हैं। महिला समिति में दिशा प्रकाश किशनानी, कुसुम आर्य कमला गोकलाणी, माया केसवानी आदि सम्मिलित किया है।  

         युवा समिति में अनिल उदासी, राहुल ठारवाणी, मुकेश आहूजा, मनोज झामनाणी, गिरीश लालवाणी, रहेंगे। प्रशासनिक समिति में राजेन्द्र जयसिंगाणी, राजेश गिदवाणी, देवीदास साजनाणी तथा सहकार समिति में किशोर टेकवाणी को जिम्मेदारी दी गई है।


आज शनिवार 14 मार्च को आयोजित होने वाले कार्यक्रम


14 मार्च शनिवार प्रात 11 बजे सिन्धी समाज महासमिति, सिन्धु इतिहास एवं साहित्य शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सिन्धू रत्न सम्मान कार्यक्रम आयोजित होगा। संयोजक गिरधर तेजवाणी रहेंगे।

सायं 7 बजे  पूज्य सिंधी पंचायत, धोलाभाटा पारां द्वारा “हिक शाम झूलण जे नाले” कार्यक्रम गंगेश्वर महादेव मंदिर, धोलाभाटा में आयोजित होगा। अध्यक्ष आसनदास पारवाणी, प्रकाश कुमार हासाणी एवं नरेश मोटवाणी रहेंगे।

सांय 7.30 बजे सिन्धु समिति, रामगंज द्वारा गुरुद्वारा के सामने पूज्य बहिराणा साहिब एवं छेज कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संयोजक रमेश दरयाणी एवं गोविन्द रिजवाणी रहेंगे।

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