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किडनी की बीमारियों में प्रारंभिक चरण की देखभाल महत्वपूर्ण : डॉ चक्रपाणि मित्तल

किडनी की बीमारियों में प्रारंभिक चरण की देखभाल महत्वपूर्ण : डॉ चक्रपाणि मित्तल

किडनी की बीमारियों में प्रारंभिक चरण की देखभाल महत्वपूर्ण : डॉ चक्रपाणि मित्तल

किडनी पीड़ित 60 प्रतिशत लोग जानकारी के अभाव में नहीं ले पाते उपयुक्त उपचार

अजमेर (अजमेर मुस्कान)।  गुर्दारोग विशेषज्ञ डॉ चक्रपाणि मित्तल ने कहा कि किडनी की बीमारी का सबसे खराब पक्ष है कि 90 प्रतिशत लोगों को  किडनी की बीमारी का पता ही तब चलता है जबकि किडनी 15 प्रतिशत से कम काम कर रही होती है। इस स्थिति में मरीज का उपचार बहुत जटिल हो जाता है। किडनी की बीमारियों में प्रारंभिक चरण की देखभाल महत्वपूर्ण होती है। बाद में मरीज के समक्ष डायलिसिस अथवा किडनी प्रत्यारोपण ही एक मात्र उपाय होता है। इससे बेहतर है कि अपने स्वास्थ्य की नियमित देखभाल करते रहें, अपने खान — पान पर और नियमित व्यायाम पर ध्यान दें और चिकित्सक के परामर्श से आवश्यक जांचें कराते रहें।

डॉ चक्रपाणि मित्तल ने बताया कि इस बार वर्ल्ड किडनी दिवस की थीम 2026: सभी के लिए गुर्दा स्वास्थ्य - लोगों की देखभाल, ग्रह की रक्षा रखी गई है। इसका उद्देश्य किडनी की बीमारियों के लिए टिकाऊ, प्रारंभिक चरण की देखभाल के महत्व को उजागर करना एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य और किडनी की बीमारियों के बीच के सीधे संबंध पर ध्यान केंद्रित करना है। क्यों कि क्रोनिक या नोन कम्यूनीकेबल (असंक्रामक) बीमारियां जैसे शुगर, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग, आदि जिस तरह बढ़ती जा रही हैं वैसे वैसे किडनी की बीमारियां भी तेजी से बढ़ती जा रही हैं।

डॉ चक्रपाणि मित्तल वर्ल्ड किडनी दिवस के अवसर अजमेर के मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर आयोजित एक कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे। डॉ चक्रपाणि मित्तल ने बताया कि किडनी फेलियर का मरीज कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होता है, इसलिए इनकी मृत्युदर बहुत ज्यादा होती है।  ऐसे मरीज जो किडनी की बीमारी होने के रिस्क पर हैं जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, किडनी की पथरी, बार बार पेशाब में संक्रमण, कैंसर व वो मानसिक रोगी जिनको लिथियम का सेवन करना पड़ रहा है उन्हें नियमित रूप से किडनी की जांच कराते रहना चाहिए।

डॉ चक्रपाणि मित्तल ने बताया कि किडनी डेमेज का शुरुआती अवस्था में पता चल जाए तो चिकित्सक से परामर्श कर उपयुक्त निदान के साथ उपचार लेना और साथ में परहेज पर रहना ही इसका उपयुक्त उपचार है। डॉ चक्रपाणि मित्तल ने कहा कि दर्द निवारक और एंटीबायोटिक गोलियों का सेवन करने से बचना चाहिए। यदि जरूरी हो तो भी चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे किडनी खराब होने की संभावना प्रबल होती है।

उन्होंने बताया कि प्रति दस व्यक्ति में एक किसी ना किसी प्रकार की किडनी की बीमारी से ग्रसित मिल रहा है। हालात तो यह है कि किडनी पीड़ित 60 प्रतिशत लोग तो रोग की जानकारी नहीं होने के कारण  ही सही उपचार नहीं ले पा रहे। किडनी पीड़ित प्रति सौ व्यक्यिों में सिर्फ 30 प्रतिशत को ही डायलिसिस की सुविधा मिल पाती है और दस प्रतिशत ही किडनी प्रत्यारोपण करा पाते हैं।

डॉ चक्रपाणि मित्तल ने बताया कि  वर्ल्ड किडनी दिवस गुर्दे की बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शुरुआती पहचान के लिए किडनी की जांच (ब्लड/यूरिन टेस्ट) को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। दूर दराज के क्षेत्र में जहां किडनी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है वहां पर भी आम जनता को किडनी की बीमारियों का इलाज उपलब्ध हो सके और इसके लिए वहां पर उपलब्ध सामान्य चिकित्सक और किडनी रोग विशेषज्ञ के बीच में किडनी की बीमारियों के इलाज के बारे में जानकारी साझा हो व उनके आपसी सहयोग से पूरा इलाज लिया जा सके।

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