सुर-ताल और साज़-आवाज़ की जुगलबंदी पर झूमे लोग
अजयमेरु प्रेस क्लब में संगीत संध्या सम्पन्न
प्रख्यात ट्रम्पेट वादक रमेश गुरुंग ने की संगत
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। सुर-ताल, साज़-आवाज़, जुगलबंदी और गायकी के तालमेल के बीच बॉलीवुड के प्रख्यात ट्रम्पेट वादक रेमश गुरूंग की संगत ने श्रोताओं को ऐसा मंत्रमुग्ध किया कि तीन घण्टे भी झूमने को कम महसूस हुए। यह माहौल था शुक्रवार 27 मार्च को अजयमेरु प्रेस क्लब के सभागार का, जहाँ क्लब ने सांस्कृतिक संस्था 'सप्तक' के साहयोग से लाइव बैंड के साथ एक अनूठी संगीत महफ़िल सजाई थी।
काठमांडू (नेपाल) मूल के प्रसिद्ध ट्रम्पेट वादक रेमश गुरूंग का सानिध्य और प्रेस क्लब के गायकों के साथ 'सप्तक' के कलाकारों की प्रस्तुति देर तक सुरों की बारिश करती रही।
शुरुआत हुई रमेश गुरूंग के एकल वादन से जिसमें "समा है सुहाना-सुहाना" गीत बजा कर उन्होंने समा को सच मे सुहाना बना दिया। दमदार आगाज़ मिला तो गायकों को भी हौसला मिला। ऐसे में गुरजेंद्र सिंह विर्दी का गीत "सुहानी रात ढल चुकी" सफल स्टार्टअप साबित हुआ। उसके बाद तो एक से बढ़ कर एक गीतों की झड़ी-सी लगती गई और शरद शर्मा के "ओ हंसिनी", डॉ रमेश अग्रवाल के "ये रात ये चांदनी फिर कहाँ", प्रताप सिंह सनकत के गीत "कई बार यूं भी देखा है" गीतों ने सुरों का ऐसा तानाबाना बुना कि श्रोता मस्ती में आ गए। इस बीच रमेश गुरूंग ने ट्रम्पेट पर "आओ न गले लगाओ न.." गीत छेड़ कर तालियाँ बटोरीं। गायकी के दूसरे दौर की शुरुआत की अमित टंडन ने। उन्होंने अपनी छवि अनुरूप किशोर कुमार के गीत "चला जाता हूँ किसी की धुन पे" की गायकी और यूडलिंग से तारीफ बटोरी, वहीं प्रदीप गुप्ता ने "हम हैं राही प्यार के", नरेंद्र जैन ने "ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाय", नवनीत पंजाबी ने "आगे भी जाने ना तू", सतीश विजयवर्गीय ने "ये जो मोहब्ब्त है" गीतों से कार्यक्रम को नई ऊंचाइयां दीं। क्लब सदस्य गोप मीरानी ने इंस्ट्रुमेंटल प्रस्तुति में हवाइन गिटार पर "अजी ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा" बजा कर महफ़िल को एक नया रंग दिया।
गायकी के अगले दौर में क्लब सदस्य एवं संगीत शिक्षक हेमन्त शर्मा ने अपने दमदार अंदाज़ में ज़िन्दगी का फलसफा पेश करने वाला गीत "रोते हुए आते हैं सब हंसता हुआ जो जाएगा" सुना कर महफ़िल लूट ली। एबीएल माथुर ने "मुझे दुनिया वालों शराबी न समझो" सुना कर दाद पाई। रमेश गुरूंग की ट्रम्पेट पर एक औऱ प्रस्तुति "ये शाम मस्तानी" ऐसी छाई कि समा नशीला हो गया। उसके बाद प्रेस क्लब सचिव अब्दुल सलाम कुरेशी की तड़कती-फड़कती गायकी ने "बदन पे सितारे लपेटे हुए" गीत छेड़ा तो माहौल तरंगित होकर झूम उठा। अनिल जैन ने "गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं" सुनाया, वहीं गोप मीरानी ने हवाइन गिटार पर एक और प्रस्तुति "आओ हुज़ूर तुमको सितारों में ले चलूं" प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन के लिए रमेश गुरूंग ने श्रोताओं की दरख्वास्त कबूल करते हुए ट्रम्पेट पर फिर तान छेड़ी और "पहला नशा पहला खुमार" गीत बजा कर कार्यक्रम को यादगार समापन दिया।
इससे पूर्व अजयमेरु प्रेस क्लब अध्यक्ष डॉ रमेश अग्रवाल सहित, उपाध्यक्ष राजकुमार पारीक, एबीएल माथुर, सप्तक के ललित शर्मा आदि अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया तथा दीप प्रज्जवलित किया। डॉ अग्रवाल ने प्रेस क्लब की गतिविधियों व कार्यक्रमों की जानकारी दी। अमित टण्डन ने मेहमान कलाकार रमेश गुरुंग का जीवन परिचय सुनाया। क्लब की तरफ से अध्यक्ष डॉ अग्रवाल ने गुरुंग का माला पहनाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सहयोग के लिए क्लब की ओर से "सप्तक" के कलाकारों ललित शर्मा, नरेंद्र जैन, सतीश दीक्षित, सुनील जैन व धर्मेंद्र सोनी सहित हेमन्त शर्मा का माल्यार्पण किया गया। क्लब सदस्य प्रदीप गुप्ता को आर्थिक सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का रोचक संचालन अमित टण्डन तथा प्रताप सनकत ने किया। अंत में "सप्तक" के संरक्षक एवं आरएसएस के पूर्व अजमेर शहर सरसंघ चालक सुनीलदत्त जैन ने आभार व्यक्त किया।
संगीत की इस महफ़िल में क्लब कोषाध्यक्ष सत्यनारायण जाला, कृष्णगोपाल पराशर, अरविंद शुक्ला, नेमीचंद तम्बोली, अमर सिंह, सुदेश शर्मा, डॉ अशोक मित्तल, डॉ शशि मित्तल, मधु अग्रवाल, जसवीर कौर विर्दी, प्रतिभा टण्डन, श्वेता शबनम, सुशील बंसल, रमेश सोनी, महादेव कर्मवानी, लोक नर्तक अशोक शर्मा आदि क्लब सदस्त, 'सप्तक' के सदस्य और उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


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