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एमडीएसयू में नामांकन बढ़ाने का महाअभियान




एमडीएसयू में नामांकन बढ़ाने का महाअभियान

कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल का स्पष्ट संदेश—‘हर शिक्षक बने प्रवेश दूत’”

“गुणवत्ता, नवाचार और जवाबदेही के साथ संस्थागत विकास का रोडमैप तैयार”


अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में आज अतिथि संकाय सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में कुलसचिव श्री कैलाश चंद्र शर्मा, नेहा शर्मा वित्त नियंत्रक, एवं विभिन्न विभागों के अतिथि संकाय सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में घटते विद्यार्थी नामांकन, शिक्षण गुणवत्ता में सुधार तथा संस्थागत विकास को गति देना रहा। बैठक की शुरुआत करते हुए कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के सुदृढ़ विकास में अतिथि संकाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में लगभग 110 अतिथि संकाय सदस्य विभिन्न विभागों में शिक्षण कार्य संभाल रहे हैं और उनसे अपेक्षा है कि वे केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित न रहकर विभागीय एवं संस्थागत दायित्वों का भी सक्रिय निर्वहन करें।


कुलगुरु प्रो अग्रवाल ने विश्वविद्यालय में प्रत्येक शिक्षक को न्यूनतम 5 से 10 नए विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य दिया तथा प्रत्येक विभाग के लिए प्रथम सेमेस्टर में कम से कम 30 विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित करने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सीट वृद्धि के लिए शिक्षक सीधे कुलगुरु से संपर्क कर सकते हैं। बैठक में नामांकन बढ़ाने हेतु व्यावहारिक और नवाचारी रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कुलगुरु ने सुझाव दिया कि शिक्षक संभावित विद्यार्थियों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करें, उन्हें विश्वविद्यालय की विशेषताओं से अवगत कराएं तथा सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रमीय वातावरण का प्रभावी प्रचार करें। विश्वविद्यालय परिसर, होस्टल, खेल सुविधाएं, छात्रवृत्तियां एवं “लर्न अर्न एंड परफ़ोर्म” जैसी योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत करने पर बल दिया गया। शिक्षण गुणवत्ता के संदर्भ में कुलगुरु ने कहा कि आज के डिजिटल युग में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक एवं कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए कि वे NET/SET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करें, साथ ही विधि विभाग में मूट कोर्ट तथा पत्रकारिता विभाग में प्रायोगिक गतिविधियों को बढ़ावा दें।


बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक विभाग वर्ष में कम से कम एक संगोष्ठी या सेमिनार का आयोजन करेगा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय स्तर पर प्लेसमेंट फेयर आयोजित करने तथा नवगठित एलुमनी एसोसिएशन के माध्यम से पूर्व विद्यार्थियों को जोड़कर संस्थान की पहचान को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। प्रशासनिक स्तर पर कुलगुरु प्रो अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परीक्षाओं के परिणाम जुलाई माह के अंत तक घोषित किए जाएं, ताकि प्रवेश प्रक्रिया समय पर प्रारंभ हो सके। अतिथि संकाय के भुगतान में हो रही देरी की जांच के निर्देश भी दिए गए तथा सभी विभागाध्यक्षों को वर्कलोड संबंधी आंकड़े शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया।


बैठक के अंत में कुलगुरु प्रो अग्रवाल ने सभी अतिथि शिक्षकों को यह संदेश दिया कि वे संस्थान के प्रति अपनत्व की भावना विकसित करें और स्वयं को केवल कार्मिक नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के विकास में सहभागी मानें। उन्होंने कहा कि “यदि एक भी विद्यार्थी कक्षा में उपस्थित हो, तो भी शिक्षण कार्य पूरी प्रतिबद्धता के साथ किया जाना चाहिए।” कुलसचिव श्री कैलाश चंद्र शर्मा ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि किसी भी विभाग का अस्तित्व उसकी प्रासंगिकता और विद्यार्थियों को आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बैठक में लिए गए निर्णयों को तत्काल क्रियान्वित करें और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

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