नागपुर में सिन्धी समाज को पट्टा वितरण से मिला मालिकाना हक
विदर्भ सिन्धी विकास परिषद,नागपुर की पहल पर राज्य सरकार के आदेश
विभाजन की विभाषिका का सामना करने वाले परिवार को मिला सम्मान - फडणवीस
भोपाल से विधायक भगवानदास सबनाणी भी हुये सम्मिलित
नागपुर (अजमेर मुस्कान)। सिन्धी समाज के लिए ऐतहासिक क्षण उस समय साकार हुआ जब जरीपटका नागपुर में आयोजित भव्य समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के हस्ते लगभग 400 लीज धारकों एवं कब्जाधारकों को रहवासी एवं कार्मिशयल फ्री होल्ड मालकी हक्क पटों का वितरण किया गया। वर्षों से अपने मालिकाना हक्क के लिये संघर्ष कर रहे सिन्धी समाज को महाराष्ट्र शासन द्वारा यह ऐतिहासिक सौगात प्रदान की गई।
कार्यक्रम का आयोजन विदर्भ सिन्धी विकास परिषद द्वारा किया गया था। समारोह में स्थानीय विधायक भगवानदास सबनाणी ने सम्बोधित करते हुये कहा कि विभाजन के समय अपना सब कुछ छोडकर अपने ही देश में विस्थापित होने वाले समाजजनों के लिये दिये गये मालिकाना हक के लिये महाराष्ट्र सरकार का आभार प्रकट किया व समाज को दिये गये सम्मान को प्रंशसनीय सेवा कार्य बताया। समाज ने वर्षों तक संघर्ष किया है और अब न्याय मिला है।
सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रारम्भ किये गये सराहनीय कार्य की पहल नागपुर के घनश्यामदास कुकरेजा व विक्की कुकरेजा के अथक प्रयासों से हुआ है और महाराष्ट्र सरकार के आदेशों की तरह अन्य राज्यों में ऐसे आदेश जारी कराने व समाजजन को मालिकाना हक दिलवाने के प्रयास किये जा रहे है।
सिन्धी केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये दिया ज्ञापन
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को भारत सरकार से संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त सिन्धी भाषा के अध्ययन व रोजगार के लिये केन्द्रीय सिन्धी विश्वविद्यालय स्थान की मांग का पत्र सौपां गया। तीर्थाणी ने बताया कि देशभर में कहीं भी स्थापित होने वाले विश्वविद्यालय से विद्यार्थियों को सिन्ध के गौरवमयी इतिहास के साथ मातृभाषा में शोध कार्य व कोर्स करने का अवसर प्राप्त होगा। ज्ञापन पर विधायक भगवानदास सबनाणी के साथ उल्लाहसनगर के विधायक कुमार आयलाणी, अमरावती के महापौर श्रीच्रद तेजवाणी सभा के राष्ट्रीय संरक्षक घनश्यामदास कुकरेजा व मोहनलाल वाधवाणी ने हस्ताक्षर कर मांग दोहराई।
कार्यक्रम में बडी संख्या में सिन्धी समाज के नागरिक, विभिन्न दरबारों, पंचायत व सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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