पार्श्व गायक मुकेश की 50वीं पुण्यतिथि पर स्वरांजलि कार्यक्रम आयोजित
सम्पूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसी रही "स्वरांजलि"
50वीं पुण्यतिथि पर अजयमेरु प्रेस क्लब ने मुकेश जी को याद किया
सदस्यों ने बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर दिल जीता
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महान पार्श्व गायक मुकेशचंद माथुर (मुकेश) की 50वीं पुण्यतिथि पर अजयमेरु प्रेस क्लब की ओर से हर वर्ष की भांति हुआ स्वरांजलि कार्यक्रम इस बार एक उत्सव बन गया। क्लब सदस्यों ने गायकी का अपना हुनर पेश कर आयोजन को एक सम्पूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम में मानो तब्दील कर दिया। बेहतरीन प्रस्तुतियों से क्लब सदस्यों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
नियत समय पर शुरू हुए कार्यक्रम में महादेव कर्मवानी ने "दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहाँ", उमेश यादव ने "कई बार यूं भी देखा है" गीत गाये; वहीं सुरेश श्रीचंदानी ने तड़कता-फड़कता गीत "ये है गीता का ज्ञान" सुनाया तो हॉल में मौजूद लोग उनके सुर में सुर मिलाकर पूरे हुंकार के साथ गीत गाने लगे। इसी क्रम में सूर्यप्रकाश गाँधी का गीत "रुक जा ओ जाने वाली रुक जा", रामगोपाल सोनी का "कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है", गणेश चौधरी का गीत "चल मेरे दिल लहरा के चल" जहां दिलों पर छाप छोड़ता गया, वहीं राकेश गौड़ की प्रस्तुति "दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई", सांस्कृतिक आयोजन समिति के सह संयोजक शरद शर्मा का "सजनवा बैरी हो गए हमार", अरविंद शुक्ला का "मुझको यारो माफ करना", क्लब सचिव अब्दुल सलाम कुरेशी का "जिन्हें हम भूलना चाहें", अतुल दुबे का "मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें" गीत भी सुनने वालों पर असर छोड़ गया। अगली कड़ी में एक बार फिर मुकेश का मस्ती भरा गीत "दुनिया एक नम्बरी तो मैं दस नम्बरी" गा कर जहां प्रदीप गुप्ता ने दाद पाई, वहीं क्लब अध्यक्ष डॉ रेमश अग्रवाल ने "हम तुमसे मोहब्ब्त करके सनम रोते भी रहे हंसते भी रहे", सुनाकर एक अलग मूड प्रस्तुत किया। वहीं एबीएल माथुर ने "डमडम डीगाडीगा" गाकर मौसम मानसूनी कर दिया, तो मुकेश परिहार ने "मेरा जूता है जापानी" सुनाकर श्वेत-श्याम फिल्मों के दौर की सैर करा दी। मंच का शानदार संचालन करते हुए अमित टंडन ने जब "ओ महबूबा तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद सुनाया तो सभागार तालियों से गूंज उठा, वहीं साथी मंच संचालक प्रताप सिंह सनकत ने रूमानी गीत " किसी राह में किसी मोड़ पर" सुनाकर फिजां में इश्क़ भर दिया। सांस्कृतिक आयोजन समिति के संयोजक हेमन्त शर्मा ने भरत व्यास लिखित गीत "ये कौन चित्रकार है" की उम्दा प्रस्तुति से प्रकृति का चित्रण किया तो समापन पर गुरजिंदर सिंह विर्दी ने मुकेश के गीतों का मेडले प्रस्तुत कर महौल में तरन्नुम घोल दी।
इससे पूर्व क्लब अध्यक्ष डॉ अग्रवाल के साथ पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र गुंजल, डॉ केसी शर्मा, ललित शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ सदस्यों ने मुकेश के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। डॉ अग्रवाल ने ऑडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से मुकेश की गायकी के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। आयोजन में आर्थिक सहयोग करने वाले राकेश गौड़ व रमेश टहलियानी का माल्यार्पण कर अभिनदंन किया गया। आभार नरेंद्र जैन ने व्यक्त किया।
इस मौके पर बालमुकुंद चौरसिया, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण जाला, सुदेश शर्मा, कमलजीत सिंह बेदी, सतीश शर्मा, मधु अग्रवाल, आभा शुक्ला, जसवीर कौर विर्दी, श्वेता शबनम, प्रतिभा टण्डन, अनिता सोनी, सुधा शुक्ला, रानी चौधरी, अनिता माथुर, रेशमा ठाकुर सहित अनेक क्लब सदस्य व उनके परिजन उपस्थित थे।



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