Ticker

6/recent/ticker-posts

आनासागर झील पर छात्राओं ने किया पक्षी अवलोकन

आनासागर झील पर छात्राओं ने किया पक्षी अवलोकन

आनासागर झील पर छात्राओं ने किया पक्षी अवलोकन

फील्ड-आधारित बर्डवॉचिंग सत्र से विद्यार्थियों में बढ़ी पर्यावरण संरक्षण की चेतना

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। पर्यावरण संरक्षण की सुदृढ़ नींव विद्यार्थी जीवन से ही रखी जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से अजमेर स्थित आनासागर झील पर मेयो गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं के लिए एक फील्ड-आधारित बर्डवॉचिंग सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का समन्वय महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा अपने आउटरीच एवं अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को पक्षियों की वैज्ञानिक पहचान की विधियों, उनकी पारिस्थितिक भूमिका तथा जैवविविधता संरक्षण के महत्व से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था। सत्र के दौरान विभाग के प्राध्यापकों, विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने दूरबीन और फील्ड गाइड की सहायता से छात्राओं को स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार के अध्ययन तथा गणना पद्धतियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

प्रातःकालीन अवलोकन में ग्रेट व्हाइट पेलिकन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अतिरिक्त ब्लैक-हेडेड गल के झुंड, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, तटबंध पर पंख सुखाते हुए ग्रेट कॉर्मोरेंट तथा खुले जल क्षेत्र में भोजन खोजती कॉमन कूट भी देखी गईं। इन प्रजातियों की उपस्थिति ने झील की पारिस्थितिक समृद्धि और प्रवासी पक्षियों के लिए इसकी उपयोगिता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।

कार्यक्रम में मेयो गर्ल्स कॉलेज की ओर से डॉ. मंजरी गर्ग, डॉ. शिल्पी वत्स, रैना शर्मा, ऋचा शर्मा, रक्षिता शर्मा, अजय प्रसाद एवं अरुण सिंह उपस्थित रहे। वहीं विश्वविद्यालय की ओर से जैवविविधता विशेषज्ञों में प्रो. प्रवीण माथुर, डॉ. विवेक शर्मा, दिवाकर यादव, रौनक चौधरी, पवन सिंह, आयुषी मीणा एवं रूबी मलिक ने छात्राओं को पक्षियों की पहचान और उनके पारिस्थितिक महत्व के बारे में मार्गदर्शन दिया।

पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रकृति से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना संरक्षण की दिशा में सबसे प्रभावी कदम है। जब विद्यार्थी स्वयं पक्षियों और पारिस्थितिक तंत्रों का अवलोकन करते हैं, तब उनमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी स्वतः विकसित होती है। उन्होंने बताया कि विभाग अपने आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से शहर के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों में जैवविविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

यह पहल न केवल छात्राओं में पर्यावरणीय चेतना को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि यदि संरक्षण की शिक्षा विद्यार्थी जीवन से प्रारंभ हो, तो भविष्य की पीढ़ी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ