स्कूली छात्रों ने सीखी कृषि विधाएं
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। तबीजी स्थित ग्राह्वय परीक्षण केन्द्र पर भारती एयरटेल फाउण्डेशन के सहयोग से क्वालिटी कार्यक्रम के तहत श्रीनगर ब्लॉक के फारकीया, हाथिभट्टा, जिलावड़ा, कानपुरा एवं कानाखेड़ी क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों से आए 28 छात्रों एवं छात्राओं ने 5 दिवस में विभिन्न कृषि क्रियाओं व एटीसी द्वारा की जारी गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
उप निदेशक कृषि (शस्य) श्री मनोज कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को इण्टरशिप का उद्देश्य, एटीसी की आवश्यकता, कृषि का महत्व एवं एटीसी द्वारा की जारी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने नवाचार के तहत कार्यालय पर लगाई गई ढ़ींगरी मशरुम प्रदर्शन इकाई का अवलोकन करवाया। इस अवसर पर डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने उद्यमिता एवं स्वरोजगार के लिए ढ़ींगरी मशरुम उत्पादन हेतु भूसा उपचारित करना, बीजाई, बैग बनाना, तुड़ाई तथा कीट-रोग नियांण से संबंधित समस्त जानकारी दी।
डॉ. जितेन्द्र शर्मा एवं डॉ. सुरेश चौधरी ने विद्यार्थियों को कार्यालय पर स्थित फसल, कीट व रोग म्यूजियम का भ्रमण करवाया। कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी डॉ. डी. एस. भाटी के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र पर विभिन्न इकाइयों का भ्रमण करवाकर जानकारी प्रदान की। सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. सुरेश चौधरी ने विद्यार्थियों को फार्म पर स्थित वर्मीकम्पोस्ट इकाई का अवलोकन करवाकर व र्मीकम्पोस्ट व वर्मीवाश के महत्व व बनाने की विधि के बारे में प्रायोगिक जानकारी दी।
कृषि अनुसंधान अधिकारी (रसायन) डॉ. कमलेश चौधरी ने विद्यार्थियों को फार्म पर प्राकृतिक खेती व जैविक खेती मॉडल अवलोकन करवाया। प्राकृतिक खेती व जैविक खेती का महत्व बताया। इस दौरान प्राकृतिक खेती व जैविक खेती में काम आने वाले आदान जैसे-नीमास्त्र व जीवामृत के महत्व व बनाने की विधि के बारे में प्रायोगिक जानकारी दी। कृषि अनुसंधान अधिकारी (शस्य) रामकरण जाट ने छात्रों को फार्म पर भ्रमण करवाकर विभिन्न फसलीय परीक्षणों के बारे में जानकारी दी। विभिन्न फसलों यथा चना, जीरा, सरसों, गेहूं व जौ पर लगने वाले कीट-रोगों के बारे में बताया। जैविक विधि से खरपतवार प्रबंधन के महत्व के बारे में बताते हुए जैविक विधि से खरपतवार प्रबंधन की प्रायोगिक जानकारी दी।
उप निदेशक कृषि (कीट) डॉ. कृष्ण गोपाल छीपा ने विद्यार्थियों को एटीसी स्थित आईपीएम प्रयोगशाला के अवलोकन के दौरान विभिन्न जैविककारकों यथा ट्राईकोडर्मा, मेटारिजियम, बैवेरिया व ट्राईकोकार्ड के उत्पादन की विधि एवं उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान की।

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