तराइन से परे पृथ्वीराज का पुनर्पाठ : इतिहास के अनछुए पहलुओं पर होगा मंथन
महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में आयोजित होगी राष्ट्रीय संगोष्ठी
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पृथ्वीराज चौहान ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक शोध केन्द्र द्वारा शुक्रवार, 15 मई 2026 को “तराइन से परे पृथ्वीराज का पुनर्कल्पित इतिहास” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वराज सभागार, बृहस्पति भवन में दोपहर 2:00 बजे से होगा।
इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय इतिहास के वीर शिरोमणि सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन, संघर्ष, सांस्कृतिक योगदान एवं ऐतिहासिक व्यक्तित्व के उन पक्षों को सामने लाना है, जिन पर अब तक अपेक्षाकृत कम विमर्श हुआ है। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति एवं विरासत से जुड़े विद्वानों द्वारा पृथ्वीराज चौहान के व्यक्तित्व एवं उनके युग की नई व्याख्याओं पर विचार प्रस्तुत किए जाएंगे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मसूदा विधायक वीरेन्द्र सिंह कानावत होंगे। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत रहेंगे, जो राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत एवं पृथ्वीराज चौहान के योगदान पर विशेष उद्बोधन देंगे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल करेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह संगोष्ठी न केवल ऐतिहासिक विमर्श को नई दिशा देगी, बल्कि युवा पीढ़ी में राष्ट्र गौरव, सांस्कृतिक चेतना एवं भारतीय इतिहास के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न करेगी।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं इतिहास प्रेमियों की उपस्थिति अपेक्षित है। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी बुद्धिजीवियों एवं नागरिकों से कार्यक्रम में सहभागिता का आग्रह किया है।

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