मित्तल हॉस्पिटल के डॉ. मुकेश गोयल ने स्थापित किया कीर्तिमान
एक ही राष्ट्रीय संगोष्ठी में दो प्रतिष्ठित फैलोशिप से सम्मानित होने वाले प्रदेश के पहले चेस्ट फिजिशियन बने
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। श्वसन रोग चिकित्सा एवं उन्नत शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश गोयल को राष्ट्रीय स्तर पर दो प्रतिष्ठित फैलोशिप से सम्मानित किया गया है। जयपुर में आयोजित 28वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी नैपकॉन-2026 में उन्हें नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस (इंडिया) तथा इंडियन चेस्ट सोसाइटी की ओर से क्रमशः एफएनसीसीपी (FNCCP) और एफआईसीएस (FICS) फैलोशिप प्रदान की गईं। राजस्थान में किसी चेस्ट फिजिशियन को एक ही राष्ट्रीय सम्मेलन में इन दोनों संस्थाओं की फैलोशिप एक साथ मिलने की यह पहली उपलब्धि बताई जा रही है।
नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस (इंडिया) और इंडियन चेस्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश से आए श्वसन रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. गोयल को ये सम्मान रेस्पिरेटरी मेडिसिन, श्वसन रोगों के उपचार तथा इस क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य और उन्नत शोध के लिए प्रदान किए गए।
इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी विशेष है कि इस वर्ष नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस (इंडिया) ने देशभर में केवल छह चिकित्सकों को फैलोशिप प्रदान की, जबकि इंडियन चेस्ट सोसाइटी की ओर से केवल चार चिकित्सकों को इस सम्मान के लिए चुना गया। ऐसे में एक ही सम्मेलन में दोनों प्रतिष्ठित संस्थाओं की फैलोशिप प्राप्त करना डॉ. गोयल की विशेषज्ञता और चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित करता है।
संगोष्ठी के दौरान डॉ. मुकेश गोयल ने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया विषय पर व्याख्यान दिया, जिसे देश-विदेश से आए चेस्ट फिजिशियंस ने सराहा। इसके अतिरिक्त उन्होंने स्नातकोत्तर चिकित्सा विद्यार्थियों को पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने सम्मेलन में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत शोध-पत्रों के निर्णायक के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई और शैक्षणिक गतिविधियों में सराहनीय योगदान दिया।
डॉ. मुकेश गोयल वर्तमान में मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। उनकी यह उपलब्धि श्वसन रोग चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्टता, शोध और चिकित्सा शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
डॉ. गोयल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरुजनों, पारिवारिक सदस्यों, मित्रों, मरीजों तथा मित्तल हॉस्पिटल के प्रशासन को दिया है। उन्होंने इनके मार्गदर्शन, सहयोग, विश्वास और प्रोत्साहन को अपनी चिकित्सकीय यात्रा तथा इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का आधार बताया।

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