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तम्बाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है पर कैंसर से लड़ने जितना कठिन नहीं : डॉ आयुषी पाटनी मित्तल

तम्बाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है पर कैंसर से लड़ने जितना कठिन नहीं : डॉ आयुषी पाटनी मित्तल

तम्बाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है पर कैंसर से लड़ने जितना कठिन नहीं : डॉ आयुषी पाटनी मित्तल

अपने परिवार की मुस्कान बचाएं, तम्बाकू को कहें गुड बाय  : डॉ. रजत चौधरी

अजमेर (अजमेर मुस्कान) । विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर नसीराबाद स्थित भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एलपीजी प्लांट पर शनिवार को आयोजित कैंसर रोग जागरुकता संगोष्ठी में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ आयुषी पाटनी मित्तल व डॉ रजत चौधरी ने तम्बाकू एवं नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से जागरूक रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा, कामकाज और पीयर प्रेशर के दबाव के कारण कई लोग धूम्रपान, तम्बाकू सेवन और अन्य नशे को तनाव दूर करने का माध्यम मानने लगे हैं, जबकि यह आदतें धीरे-धीरे कैंसर सहित अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बनती हैं।

डॉ आयुषी पाटनी मित्तल ने तो यह तक कहा कि तम्बाकू का सेवन छोड़ना मुश्किल हो सकता है पर कैंसर से लड़ने जितना कठिन नहीं होगा। डॉ रजत चौधरी ने कहा कि तम्बाकू को जितना जल्दी संभव हो गुडबाय कहें और अपने परिवार की मुस्कान को बचाएं। उन्होंने विश्व तम्बाकू निषेध दिवस को यह संकल्प लेने का अच्छा अवसर बताया।

गौरतलब है कि इस संगोष्ठी का आयोजन मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। डॉ आयुषी पाटनी मित्तल और डॉ रजत चौधरी ने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा घोषित वर्ष 2026 की थीम “अनमास्किंग द अपील: काउंटरिंग निकोटीन एंड टोबैको एडिक्शन” का अर्थ है तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की चमक-धमक, आकर्षक पैकेजिंग और भ्रामक प्रचार के पीछे छिपे सच को सामने लाना। इसका उद्देश्य लोगों, खासकर युवाओं, को यह समझाना है कि ये उत्पाद दिखने में आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में लत, कैंसर और कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।

देश में होने वाले 27 प्रतिशत कैंसर तम्बाकू से जुड़े हैं :-

डॉ आयुषी पाटनी मित्तल ने कहा कि विश्वभर में प्रतिवर्ष लगभग 80 लाख लोगों की मृत्यु तम्बाकू सेवन के कारण होती है और भारत में यह आंकड़ा करीब 13.5 लाख है। देश में होने वाले लगभग 27 प्रतिशत कैंसर तम्बाकू से जुड़े हैं। तम्बाकू के सेवन से मुंह, गले, फेफड़ों, खाने की नली, पेट, मूत्राशय, बच्चेदानी के मुंह का, किडनी, पैंक्रियास, और ब्लड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। तंबाकू हार्ट अटैक, फेफड़ों का कमज़ोर होना, लकवा, उच्च रक्तचाप, मुँह में इन्फेक्शन, महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, हड्डियों की कमजोरी तथा गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। वहीं पैसिव स्मोकिंग भी उतनी ही घातक है, जिससे विश्व में हर वर्ष लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु होती है।


तनाव दूर करने के लिए नशा नहीं योग अपनाएं :-

डॉ आयुषी पाटनी मित्तल ने कहा कि तनाव दूर करने के लिए नशा नहीं, बल्कि योग, ध्यान, नियमित व्यायाम, सकारात्मक सोच और परिवार के साथ समय बिताना अधिक प्रभावी उपाय हैं। इस समस्या के निवारण के लिए  सरकार द्वारा कई नशामुक्ति केंद्र खोले गए हैं जहाँ आपको प्रोफेशनल सहायता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि तम्बाकू केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक खुशियों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने लोगों से कहा कि तम्बाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है पर तम्बाकू के कारण होने वाले कैंसर से लड़ने जितना कठिन नहीं होगा। इसलिए उन्होंने अपील की कि विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर स्वयं तम्बाकू से दूर रहने का संकल्प लें और अपने परिवार व समाज को भी स्वस्थ, सुरक्षित एवं कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर प्रेरित करें।

तम्बाकू सेवन आदनहीं बल्कि धीमा जहर :-

मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ रजत चौधरी ने युवाओं और आमजन से तम्बाकू एवं धूम्रपान से दूरी बनाने की अपील करते हुए कहा कि तम्बाकू केवल एक आदत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे जीवन को खत्म करने वाला जहर है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि पारंपरिक तम्बाकू उत्पादों के साथ-साथ अब तम्बाकू उद्योग युवाओं और किशोरों को आकर्षित करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहा है। ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच, फ्लेवर्ड वेपिंग और कैंडी जैसे स्वाद वाले उत्पादों को आधुनिक जीवनशैली और फैशन का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, डिजिटल विज्ञापनों और ग्लैमरस प्रचार के माध्यम से बच्चों और युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित कर उन्हें निकोटीन की लत की ओर धकेला जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है। तथाकथित “कूल” दिखने की यह संस्कृति वास्तव में तम्बाकू उद्योग की सुनियोजित रणनीति है। चमकदार पैकेजिंग, आकर्षक फ्लेवर और ऑनलाइन प्रचार के पीछे छिपा सच कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां और मानसिक निर्भरता जैसी गंभीर समस्याएं हैं।

तम्बाकू मुक्त जीवन अपनाएं परिवार की मुस्कान बचाएं :-

डॉ. चौधरी ने कहा कि कई बार इलाज संभव होने के बावजूद मरीज और उसका पूरा परिवार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे दिखावे और क्षणिक आकर्षण से बचते हुए फिटनेस, खेल, योग, संगीत और सकारात्मक जीवनशैली को अपनाएं। तम्बाकू मुक्त जीवन का संकल्प आने वाले वर्षों में पूरे परिवार की मुस्कान और खुशहाली बचा सकता है।

इससे पहले भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड एलपीजी प्लांट आॅडिटोरियम में पहुंचने पर भारत पेट्रोलियम के टेरीटरी मैनेजर अजय कुमार यादव ने कैंसर रोग विशेषज्ञों का स्वागत किया। इस मौके पर खास तौर पर उपस्थित मित्तल हॉस्पिटल के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ चक्रपाणि मित्तल, हॉस्पिटल के सीनियर जनसम्पर्क अधिकारी नितेश भारद्वाज का स्वागत किया गया। संगोष्ठी के आरंभ में प्लांट मैनेजर दीपक नैयर गोपीनाथन ने भारत पेट्रोलियम की ओर से कैंसर रोग विशेषज्ञों का परिचय कराया और विषय पर प्रकाश डाला। अंत में भारत पेट्रोलियम के टेरीटरी मैनेजर अजय कुमार यादव ने आभार व्यक्त किया।

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