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महर्षि दयानंद के आदर्शों पर आधारित विश्वविद्यालय संस्कृति विकसित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय

महर्षि दयानंद के आदर्शों पर आधारित विश्वविद्यालय संस्कृति विकसित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय

महर्षि दयानंद के आदर्शों पर आधारित विश्वविद्यालय संस्कृति विकसित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में  आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली एवं शैक्षणिक वातावरण में महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों, आदर्शों एवं सिद्धांतों को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने की, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के सभी शिक्षण विभागों, परीक्षा अनुभाग, प्रशासनिक कार्यालयों, लेखा एवं स्थापना शाखा, पुस्तकालय, औषधालय सहित सभी इकाइयों में प्रतिदिन कक्षाओं के आरंभ से पूर्व प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक सोमवार प्रातः 10 बजे भारत मुनि ऑडिटोरियम में साप्ताहिक सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी तथा अन्य संबंधित सभी कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

प्रार्थना सभाओं के समन्वय एवं संचालन की जिम्मेदारी मुख्य कुलानुशासक प्रो. अरविंद पारीक एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. सुभाष चंद्र को सौंपी गई है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय की सभी प्रमुख शैक्षणिक एवं संस्थागत गतिविधियों, जैसे शैक्षणिक सत्रारंभ, स्थापना दिवस, दीक्षांत समारोह, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगोष्ठियों एवं विशेष आयोजनों का प्रारंभ वैदिक हवन से किया जाएगा।

कुलगुरु प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि विद्यार्थियों में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के विकास के उद्देश्य से महर्षि दयानंद सरस्वती के दर्शन एवं सिद्धांतों पर आधारित एक क्रेडिट का मूल्यवर्धित पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा, जिसे सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा। साथ ही, नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय के सभी विभागों की बोर्ड ऑफ स्टडीज बैठकों का आयोजन 10 फरवरी से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने विश्वविद्यालय को महर्षि दयानंद सरस्वती की शैक्षिक दृष्टि का जीवंत प्रतीक बनाने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया, जिसमें आध्यात्मिक अनुशासन, नैतिक मूल्य एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता का समन्वित विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

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